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मोटरवाहन दुर्घटनाएं-वीरेंद्र देवांगना

मोटरवाहन दुर्घटनाएं::
उच्चतम न्यायालन ने सड़कों पर गड्ढ़ों की वजह से 2013 से 2017 के बीच 14,926 लोगों की मौतों पर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे अस्वीकार्य बताया है। सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने कहा है कि सड़कों पर गड्ढ़ों के कारण होनेवाली मौतों का आकड़ा सीमापार या आतंकवादियों द्वारा की गई हत्याओं से ज्यादा है। उन्होंने यह भी कहा कि जारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2017 में गड्ढ़ों ने 3,597 लोगों की जान ली, यानी हर दिन 10 लोगों की मौत इन गड्ढ़ों के कारण हुई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के सड़क सुरक्षा पर जारी 2015 के रपट में कहा गया है कि दुनियाजहान में सड़क हादसों में करीब 12.5 लाख लोगों की मौत होती है। भारत में यह आंकड़ा 1.50 लाख है। सड़क दुधर्टना विश्वभर में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है।
जबकि भारत समेत दुनिया के 100 मुल्क यूएन की पहल पर ‘संयुक्त राष्ट्र सड़क सुरक्षा दशक’-2011-2020 मना रहे हैं। इसमें सड़क हादसों में 50 प्रतिशत कमी करने का लक्ष्य रखा गया है। गौर-ए-काबिल है कि भारत में दुनियाभर के कुल 3 प्रतिशत वाहन हैं तथा यहां विश्व का तीसरा बड़ा सड़क नेटवर्क है। जबकि विश्व की तुलना में 10 प्रतिशत सड़क हादसे भारत में होते हैं।
बस दुर्धटना में 33 कर्मचारियों की मृत्युः महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के डाॅ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विवि के 34 कर्मचारी 28.07.2018 को महाबलेश्वर पिकनिक मनाने जा रहे थे। बस अंबेनाली घाट, पोलडपुर के पास घने जंगल में 500 फीट गहरी खाई में जा गिरी, जिसमें एक को छोड़कर 33 लोगों की मौत हो गई। एक प्रशांत सावंत देसाई इसलिए बच गया कि वह गिरती बस से छलांग लगाकर एक पेड़ की डाली को पकड़ लिया।
नौ कबड्डी खिलाड़ियों की मौतः ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में हुए सड़क हादसे में 09 कबड्डी खिलाड़ियों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 15 गंभीर रूप से धायल हो गये। हादसा सुंदरगढ़ के सुआरापल्ली गांव के पास हुआ, जहां एक मिनी ट्रक पुल के ऊपर से गिर गया। बताया जा रहा है कि वाहन में करीब 30 लोग सवार थे। हादसा चालक की लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने से हुआ।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि देश में सड़क हादसे साल-दर-साल बढ़ रहे हैं। हादसों में शिकार होनेवाले ज्यादातर युवा हैं, जो 15-35 वर्ष के हैं, जो अभी ठीक से दुनिया देखे भी नहीं हैं, जो देश के भविष्य के खेवनहार हैं। युवावर्ग सकल हादसे का 53 फीसद है।
गौरतलब है कि भारतीय सड़कों में चाहे वह स्वर्णिम चतुर्भज हो, राष्ट्रीय राजमार्गं, राजमार्गं या बारहमासी सड़कें, रोजाना 1,317 दुर्धटनाएं होती हैं, जिसमें 413 लोगों की मौत हो जाती है। अर्थात हर घंटे 55 हादसें, जिसमें 17 की मौत। रोजाना ट्रक से ट्रक और ट्रक से बस-जीप-कार-मोटरसायकिल की टक्कर हजारों की तादाद में होती रहती है।
हादसों में 67,250 के साथ तमिलनाडु सबसे आगे है, वहीं मौतों में 16,287 के साथ उत्तरप्रदेश अग्रणी है। देशभर में सड़क दुर्धटनाओं में लक्ष्यद्वीप सबसे कम है, जहां 2014 में एक सड़क हादसा हुआ, पर मौत नहीं हुई।
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