Notification

मोटरवाहन विधेयक का विरोध-वीरेंद्र देवांगना

मोटरवाहन विधेयक का विरोध::
जहां विधान भवन, सिविल एरिया, पास कालोनी, मंत्रालय, सचिवालय, राजभवन, सिविल कालोनी, मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक, सांसद निवास और बड़े सरकारी कार्यालय हों, वहां साल में कई-कई बार सड़कें सुधारने का चलन है। लेकिन, जहां आम जनता का आना-जाना व रहना होता, वहां सड़कें कई-कई सालों में बनती है। वहां सड़कें ढूंढने से भी नहीं मिलती। दूरदराज के गांवों व वनप्रांतरों की बात ही दीगर है। वहां सड़कों में गड्ढों के सिवाय कुछ और नहीं मिलता।
27 अक्टूबर 2014 को रामपुर, उप्र निवासी 14 वर्षीय मारूफ की बाइक फिसल गई। उसका सिर डिवाइडर से टकराया। हेलमेट नहीं पहनने के चलते सिर में गंभीर चोटें आईं। पहले उसे मुरादाबाद, उप्र के अस्पताल में भर्ती करवाया गया। फायदा नहीं होने पर फोर्टिस अस्पताल, नई दिल्ली में भर्ती किया गया। वहां वह 70 दिन तक आईसीयू में रहा।
पांच साल बीत गए। वह तब नौवीं का किशोर छात्र था। आज युवा हो गया है। दाड़ी-मूंछ उग आई है। वह जिंदा तो है, लेकिन बेहोश है। कोमा में है। पांच साल से बिस्तर पर पड़ा है। न हिल-डुल सकता है, न बोल-चाल कर सकता है। मां रूखसाना और पिता मकसूद केवल सेवा में लगे हैं। अब तक दो करोड़ खर्च हो चुके हैं। जमीन-जायदाद बिक चुका है।
यह है, बालीउम्र में बगैर हेलमेट वाहन चलाने का भयावह नतीजा। अब, उसके माता-पिता पछताते हैं कि कमउम्र में हमने उसे बाईक चलाने की अनुमति क्यों दी?
19 सितंबर 2019 को दिल्ली एनसीआर में कमर्शियल वाहनों की हड़ताल से जनजीवन प्रभावित हुआ। वाहन संचालक मोटर वाहन विधेयक संशोधन कानून 2019 में कई गुना बड़ा हुआ जुर्माना, बढ़ी हुई बीमा राशि के आलावा रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन डिवाइस (आरएफआइडी) की अपरिहार्यता का विरोध कर रहे थे।
इसी तरह पहले मप्र, राजस्थान, छग, पंजाब, प. बंगाल और अब गुजरात जैसे राज्य इस अधिनियम को लागू करने में अपनी असमर्थता जता रहे हैं। गुजरात ने तो इसे आंशिक संशोधन कर लागू किया है।
सवाल यह कि क्या केंद्र के किसी कानून में राज्य अपने स्तर से बदलाव कर सकते हैं। इस पर कानूनविदों की राय है कि चूंकि सड़क परिवहन समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए राज्य इसमें संशोधन कर नया कानून बना सकते हैं। इस लिहाज से इसके तीन आयाम संभावित हैं।-
1. राज्य सरकार एक अधिसूचना के तहत नये मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक को जस-का-तस लागू कर सकते हैं, जिसके पालना की जिम्मेदारी वहां के पुलिस व प्रशासन की होगी।
2. राज्य सरकार इससे असहमत हैं, तो उसको अपना कानून बनाने के लिए राष्ट्रपति की अनुमति लेनी होगी। जब तक नया कानून नहीं बन जाता, तब तक केंद्र के कानून का पालन करना होगा। चालान अदालती कार्रवाई से वसूला जाएगा।
3. उपर्युक्त स्थितियों के अलावा यदि राज्य राष्ट्रपति की अनुमति के बिना मनमाना कानून बनाता है, तो यह संवैधानिक अराजकता की स्थिति होगी।
–00–

Leave a Comment

Connect with



Join Us on WhatsApp