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नशे का कारोबार::-वीरेंद्र देवांगना

नशे का कारोबार::
यूएन आफिस आफ ड्रग एंड कंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में दुनियाभर में पूर्ति होनेवाले कुल गांजा का 6 प्रतिशत अर्थात करीब 300 टन गांजा भारत में जब्त किया गया था। 2017 में यह जब्ती 353 टन हो गई। वहीं, 2017 में चरस 3.2 टन सीज की गई। इससे अनुमान है कि भारत में इसका सालाना कारोबार करीब 10 लाख करोड़ रुपए का है।
आता कहां से है ड्रग्स
ड्रग्स का मुख्य उत्पादक देश अफगानिस्तान है। जहां से तीन रास्ते से यह चोरी-छिपे भारत आता है। पहला-पाकिस्तान के रास्ते से, जो पहले पंजाब पहुंचता है, फिर जम्मूकश्मीर और दिल्ली सहित देश के बाकी हिस्सों में पहुंचाया जाता है।
ड्रग्स का दूसरा रास्ता भी पाकिस्तान ही है, जो लाहौर से होता हुआ, पहले गुजरात पहुंचता है, फिर देश के बाकी हिस्सों में। तीसरा रास्ता ईरान, इराक, दुबई के रास्ते होता हुआ पहले तटवर्ती इलाकों में पहुंचता और देशभर में फैल जाता है।
हालांकि एनसीबी के अधिकारी सालभर इनकी छापेमारी करते रहते हैं, लेकिन इनके आपूर्तिकर्ता पैडलर इतने चतुर-चालाक होते हैं कि कभी पेट्रोल की टंकी के नीचे चिपकाकर, कभी बैकलाइट में छिपाकर, कभी सीट कवर में भरकर, कभी कापी-किताब जैसी पैकिंग कर, कभी बोनट व डिक्की में छिपाकर, कभी कपड़े में सी कर, तो कभी सूटकेस में भरकर इसकी सप्लाई एक शहर से दूसरे शहर चोरी-छिपे करते रहते हैं।
यह काफी महंगा होता है, जो आमलोगों की क्रयशक्ति से बाहर का होता है, इसलिए सेवनकर्ता भी खास लोग-यानी फिल्मी सितारे, क्रिकेटर की पत्नियां, बड़े उद्योगपति और उसकी संतानें, नेताओं, आलाधिकारियों, धन्नासेठों व धनकुबेरों की बिगडैल औलादें इसके मुख्य ग्राहक होते हैं।
आमलोगों की बात करें, तो वे सालभर में होली के अवसर पर एक बार भांग की गोली खा लें या भंग का शर्बत ही पी लें, यही उनकी खुशनशीबी होती है। यह भुलक्कड़ नशा होता है, जो आदमी को झुलाता है, सुलाता है, रुलाता है, हंसाता है और काफी कुछ खिलवाता है। आदमी नशे में जो करता है, उसी में खोया रहता है। उसे अगल-बगल की सुध नहीं रहती।
मानलो नशा चढ़ने के बाद कोई नहाने चला जाता है, तो वह सुध-बुध खोकर नहाता ही रहता है; खाने पर बैठता है, तो फखत खाता ही रहता है; हंसता है, तो हंस-हंसकर लोट-पोट होता रहता है; रोता है, तो रो-रोकर बुरा हाल कर लेता है; सोता है, तो गहरी नींद में समा जाता है। इसका नशा कम करना है, तो खटाई खाई जाती है और बढ़ाना है, तो मिठाई खाई जाती है।
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