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आनलाइन बनाम आफलाइन-वीरेंद्र देवांगना

आनलाइन बनाम आफलाइन::
कान्फेडरेशन आफ आल इंडिया टेªडर्स एसोसिएशन (कैट) का कहना है कि देश में रिटेल व्यापार में केवल 1.6 फीसद की हिस्सेदारी ई-कामर्स कंपनियों की है, लेकिन इस छोटी सी हिस्सेदारी में इन्होंने देश के 40 फीसद खुदरा व्यापार को पूरी तरह से बरबाद कर दिया है।
उसका यह भी कहना है कि जब मामूली सी हिस्सेदारी से रिटेल कारोबार 40 प्रतिशत प्रभावित हो गया है, तो फुटकर व्यापार कितना प्रभावित नहीं होगा।
यही कारण है कि पिछले एक साल में 50 हजार से अधिक मोबाइल खुदरा विक्रेता, 30 हजार से अधिक इलेक्ट्रानिक्स खुदरा विक्रेता, 25 हजार से अधिक किराना खुदरा व्यापार और 35 हजार से अधिक कपड़ा फुटकर विक्रताओं ने कारोबार समेट लिया है।
कान्फेडरेशन आफ आल इंडिया टेªडर्स एसोसिएशन (कैट) ने आनलाइन कंपनियों से जुड़ी हुई कंपनियों को चेतावनी दिया है कि अब आनलाइन में ज्यादा छूट दी गई, तो उनके उत्पादों का बहिष्कार किया जाएगा। कैट ने इन कंपनियों से ज्यादा डिस्काउंट देने पर जवाब भी मांगा था, लेकिन कंपनियों ने कोई जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। कैट ने इस रवैये से नाराजगी जताई और बहिष्कार की चेतावनी दी है।
कैट ने आनलाइन कंपनियों के नीतियों के खिलाफ 25 नवबंर को विरोध जताया। उनका कहना है कि आनलाइन कंपनियां एफडीआइ नीति एवं नियम का उल्लंधन कर रही हैं। इन पर सख्त रवैया अपनाना जरूरी है। कैट से जुडे़ संगठनों का यह विरोध देश के 500 से अधिक जिलों और 300 से अधिक शहरों में एक साथ हुआ।
दूसरी ओर उपभोक्ताओं को आनलाइन बुकिंग पर सस्ते में खाना, नाश्ता उपलब्ध करानेवाली आनलाइन फूड कंपनियां अब अपना खुद का खाना बनाकर बेचने की तैयारी कर रही हैं। कुछ कंपनियों ने तो देश के नगरों व शहरों के अंदर अपना ठिकाना ढूंढना आरंभ कर दिया है, कुछ ने तो ठिकाना ढूंढ भी लिया है।
कइयों ने शादी-विवाह के लिए आकर्षक पैकेज आरंभ कर दिए हैं। जीएसटी में हुई कटौती के कारण इन पैकेजों के दाम भी सस्ते हो गए हैं। इसके लिए होटल कारोबारी इन कंपनियों के खिलाफ कोर्ट जाने के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा आयोग जाने की भी तैयारी कर रहे हैं।
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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