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पाकिस्तान का कबूलनामा::वीरेंदर देवांगना

पाकिस्तान का कबूलनामा::
एफएटीएफ के प्रतिबंध से बचने के लिए पाकिस्तान की फेडरल जांच एजेंसी ने मुंबई हमले के मददगार अपराधियों के नाम उन आतंकियों की सूची में शामिल किए हैं, जो 12 सालों से पाकिस्तान में पनाह लिए हुए है।
यद्यपि इस सूची में मुख्य साजिशकर्ता का नाम छुपाकर पाकिस्तान ने चालबाजी की है, तथापि उसका कबूलनामा बयां करता है कि वही भारत में हमले करवाता है और हमलावरों को अपने यहां शरण देता है।
भारत सरकार पूर्व में ये सारे सुबूत दे चुका है कि किस तरह शुरू से लेकर आखिर तक साजिश पाकिस्तान में रची गई थी।
अब, पाकिस्तान ने भी स्वीकारा है। देखना यही है कि वह आगे कौन-सा कदम उठाता है? एफएटीएफ को चाहिए कि वह अपने आगामी बैठक में दोगले पाकिस्तान को ब्लेक लिस्टेड करे, ताकि उसको आतंकवाद को पालने-पोसने की सजा मिले।
यही नहीं, वह अपने सरीखे कुछेक कट्टरपंथी मुल्कों के साथ मिलकर भारत को परेशान करने के लिए हर मंच पर कश्मीर का राग अलापता रहता है।
जब वह अहमदिया मुसलमानों को प्रताड़ित करने से बाज नहीं आ सकता, तब वह हिंदुओं, बौद्धों, सिक्खों और ईसाइयों को कितना प्रताड़ित नहीं किया होगा। यही कारण है कि 1947 के समय जहां 24 प्रतिशत आबादी गैरमुस्लिम थी, वहीं अब घटकर 3 प्रतिशत रह गई है।
जबकि उसको पता है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। उलटे वह पीओके को हथियाया हुआ है। यह तो उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत को चरितार्थ करना हुआ।
कश्मीर घाटी में 1990-91 में जब पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का कहर चरम पर था, तब वहां कश्मीरी पंडितों को ढूंढ-ढूंढकर मारा जा रहा था। उन्हें उनके घर, जमीन, संपत्ति से बेदखल कर भगाया जा रहा था। पंडितों के घरों में आतंकी संगठनों की उर्दू में लिखी चिट्ठियां पहुंच रही थीं।
चिट्ठी में धमकीभरी भाषा में लिखी होती थी,‘‘अपना घर, खेती-बाड़ी, सेवफल के बगीचे, मवेशी आदि सब छोड़कर तुरंत चले जाओ, अन्यथा मार दिए जाओगे।’’
इसी तरह का एलाउंस मस्जिदों से भी किया जाता था कि महिलाओं को छोड़कर चले जाओ या घर्म बदलकर मुसलमान बन जाओ, वरना मार दिए जाओगे।
चिट्ठी पढ़कर और एलाउंस सुनकर पंडितों के होश उड़ गए। ऐसी दशा में किसी के भी होश उड़ सकते थे। विचलित हो सकते थे। कइयों ने पलायन किया। जो न कर सके, उनपर कहर टूट पड़ा।
आतंकियों ने उनके घरों में घुसकर लूटपाट की। मवेशियों को खोल दिए। बच्चों का अपहरण किया। महिलाओं से दुष्कर्म किया। भांति-भांति की प्रताड़नाएं दीं।
इन गुस्ताखियों के लिए भारत सरकार को चाहिए कि उसको बालाकोट जैसी ऐसी सजा दे कि उसकी सात पीढ़ियां भारत की ओर आंख उठाकर देखने की जुर्रत न कर सके।
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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