पानी की समस्या-पूजा पाटनी

पानी की समस्या-पूजा पाटनी

  पानी की समस्या किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी धरती की है। इस धरती पर जितने भी जीव-जन्तु, पेड़-पौधे, व मानव किसी का भी जीवन बिना पानी के संभव नहीं है। हर एक को जीवित रहने के लिए पानी की आवश्यकता है। यही कारण है कि हर जगह लिखा होता है कि “जल ही जीवन है”, “जल नहीं तो कल नहीं”। पानी की एक-एक बूँद बहुत कीमती है।
       कभी आप धूप में झुलसते हुए पेड़-पौधों को देखो, अगर उन्हें थोड़ा पानी दे दिया जाये या बारिश हो जाए तो ऐसा लगता है मानो वो खुशी में नाच रहे हो। यही हाल मानव व जानवरों का भी होता है।
      जब पानी इतना अनमोल है तो लोग इन्हें बरबाद क्यों करते है। मानव धरती पर सबसे समझदार माना जाता है, और सबसे ज्यादा पानी की बरबादी भी वही करता है। हमारी धरती को नीला गृह कहा जाता है। क्योंकि इसका 70% भाग पानी है, परंतु पीने योग्य पानी बहुत कम है।
     मानव के जल के अंधाधुंध प्रयोग और बरबादी के कारण दुनिया जलसंकट की कगार पर खड़ी है। आखिर वह कौन से कारण है जिनके कारण जल संकट पैदा हुआ है।
1. जल के बहुत अधिक प्रयोग के कारण धरती के नीचे जल का स्तर निरंतर कम होता जा रहा है।
2. जनसंख्या का लगातार बढ़ते जाने के कारण पानी की खपत भी बढ़ रही है।
3. जनसंख्या वृद्धि के कारण हरे-भरे जंगल कट रहे है। और वहाँ रहने के लिये मकान व कारखाने खुल रहे है।
4. इन बड़े-बड़े कारखानों का गन्द नदियों में आकर मिलता है। जिस कारण पानी प्रदूषित हो जाता है। और पीने की पानी की कमी होती जा रही है। आप लोग देखते होगे कई इलाको में पानी कितना गंदा व बदबूदार आता है।
5. पेड़ो के कटने, जनसंख्या बढ़ने के कारण धरती का तापमान बढ़ता जा रहा है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम का संतुलन भी बिगड़ गया है।
6. गरमी अधिक होने लगी है जिस कारण जलाश्य सूख रहे है।
7. सबसे बड़ा कारण आदमी का पानी बरबाद करना है।
         अगर हमने जल्द ही कुछ नहीं किया तो बहुत बड़ा संकट आ सकता है। इसके लिए हमें यह सब करना चाहिए:-
1. सबसे पहले हमें पानी की बरबादी रोकनी चाहिए। नल से पानी बेकार नहीं बहने देना चाहिए। फाउंटेन की बजाए बाल्टी से नहाना चाहिए।
2. बारिश के पानी को इकटठा करके इसे प्रयोग करना चाहिए।
3. कपड़े धोने के बाद के पानी अपने पौधों में डाल देना चाहिए।
4. अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए इससे हरियाली रहेगी और बारिश भी अच्छी होगी।
5. ग्लोबल वार्मिंग कम होगी जिससे तापमान ठीक रहेगा।
6. कारखानों को पानी दूषित करने पर दण्ड मिलना चाहिए।
7. पार्को में फव्वारे कम से कम चलाए जाने चाहिए।
                 अगर हम सब मिलकर इन सब बातों पर ध्यान देंगे तो हम इस जल संकट से बच सकते है। अभी भी देर नहीं हुई है।
पूजा पाटनी 

Ravikant Agarwal

मैं रविकांत अग्रवाल पुणे महाराष्ट्र का निवासी हूँ। मैं वीर रस और श्रृंगार रस का कवी हूँ। मैं साहित्य लाइव में मुख्य संपादक तथा दिशा-लाइव ग्रुप मे प्रेस प्रवक्ता के रूप में काम कर रहा हूँ।

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