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पर्यावरण की रक्षा के लिए पटाखों पर प्रतिबंध-वीरेंद्र देवांगना

पर्यावरण की रक्षा के लिए पटाखों पर प्रतिबंध::
नागपुर स्थित राष्ट्रीय विस्फोटक नियंत्रक मुख्यालय से जारी दिशानिर्देशों के पश्चात छग और हरियाणा सरकार ने अनुकरणीय पहल करते हुए विदेशी पटाखे रखने और उनके बेचने पर पाबंदी लगा दिया है।
अब व्यावसायियों को लाइसेंस लेने के दौरान शपथपत्र देना होगा कि वे विदेश में निर्मित पटाखों की बिक्री नहीं करेंगे और न ही वे ऐसे पटाखों का भंडारण करेंगे।
विस्फोटक अधिनियम के तहत चीनी पटाखों के आयात पर पाबंदी है। इनमें क्लोराइड और परक्लोराइड जैसे रसायन होते हैं, जो अत्यंत खतरनाक होते हैं, जो वातावरण को अत्यधिक प्रदूषित करते हैं। चीनी पटाखों के चलते प्रतिवर्ष स्वदेशी उद्योग को 2 हजार करोड़ रुपये की चपत पड़ती है। ये पटाखे तस्करी से बांग्लादेश के बंदरगाहों से भारत पहुंचाई जाती है।
भारतीय पटाखों में उपयोग किए जानेवाले नाइटेªट की बनिस्बत क्लाराइड 200 से अधिक डिग्री सेल्सियस तापमान में पिघलता है। इसमें जरा-सी रगड़ विस्फोट का कारण बनता है। चीन की सम शीतोष्ण जलवायु इन पटाखों के रखरखाव के अनुकूल है, जबकि भारतीय उष्ण कटिबंधीय जलवायु में इनके आग पकड़ने का अधिक अंदेशा रहता है। यही कारण है कि देश में पटाखों में आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं।
इसी तरह नेशनल ग्रीन ट्रिव्यूनल ने कंेद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय सहित दिल्ली, हरियाणा, उप्र और राजस्थान सरकारों से पूछा है कि पटाखों को क्यों न 7 नवंबर से 30 नवंबर तक प्रतिबंधित कर दिया जाए।
यहां एनजीटी की मंशा उत्सवधर्मिता को हतोत्साहित करने की नहीं, अपितु पर्यावरण के रक्षार्थ है, जिस पर इन सरकारों को त्वरित फैसला लेकर बिगड़ते आबोहवा को बचाने के लिए कारगर कदम उठा लेना चाहिए।
हालांकि कोविड-19 के कहर के चलते स्वास्थ्य रक्षा के लिए यह फैसला लेना जरूरी हो गया है, जो समीचीन है। लेकिन, पर्यावरण को स्थायी तौर पर बचाए रखने के लिए यह फैसला भी ले लेना चाहिए कि पटाखों को देश में हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाए।
पर्यावरण को नुकसान पहुंचानेवाले तत्वों में परालीदहन, वाहनों के दूषण, उद्योगों की चिमनियां, धमनभट्टियां, भवन व सड़क निर्माण के धूल, टैªफिक जाम के बाद पटाखों का नंबर आता है, लेकिन जो पटाखे आबोहवा को नुकसान पहंुचा रहे हों, उसको स्थायी तौर पर प्रतिबंधित कर देने से देशवासियों का भला ही होना है। फिर चाहे शादी समारोह हो या अन्य कोई मांगलिक कार्यक्रम, सबमें इसके उपयोग की पाबंदी लगा दी जानी चाहिए।
इसकी जगह पर ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल किया जा सकता है, जो पर्यावरण हितैषी है और जिसके लिए सुप्रीमकोर्ट ने भी अनुशंसाएं की हुई हैं। देश के लिए वायु-प्रदूषण एक ऐसी समस्या है, जिसका हल निकट भविष्य में निकाला ही जाना चाहिए, अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब देशवासियों के लिए मुसीबतें खड़ी होनी शुरू हो जाएंगी। उनका सांस लेना और जीना मुहाल हो जाएगा, जो उनके जीने के अधिकार के साथ कुठाराघात होगा।
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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