रावण-हेमा पांडे

रावण-हेमा पांडे

एक 5 साल का लड़का अपने पिता से कह रहा है कि जो चुनौती नहीं ले सकता वह जीवन में मनुष्य नहीं बन सकता .वह व्यक्ति क्या जो तूफान से लड़ न सके जो समुद्र के अंदर कूदना सके. जो भंवर के बीच जाकर लौटना सके. वह मनुष्य ही क्या. मनुष्य वह है जो सामने आई चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर सके. और पलट दे अपने जीवन को. आने वाली युग को .वर्तमान युग को. और पूरे ब्रह्मांड को .पिता विश्रवा अपने 5 साल के पुत्र को आश्चर्य से देखते रहे उन्होंने कहा तुम्हें मालूम है तुम क्या कह रहे हो तुम अपने दादा को देखो वह भी ब्राह्मण हैं और भिक्षा मांगकर गुजारा करते हैं. उसी कर्तव्य को मैं तुम्हें याद दिला रहा हूं .ब्राह्मण की जीवन का उद्देश्य केवल ज्ञान देना है. भिक्षा मांग कर अपना जीवन यापन करना है .रावण ने कहा होता होगा मैं कब कह रहा हूं कि ऐसा नहीं होता है .मगर मैं ऐसा जीवन जी ही नहीं सकता .मैं जीवन जी लूंगा तो दम और खान के साथ जी लूंगा और रावण घर से निकल पड़ा अगले 6 साल बहुत कठिनाई निर्धनता और परेशानी में बीते. जब उसका यज्ञोपवीत संस्कार हुआ तब वह अपने दादा को लक्ष्य के पास गया .और उनसे कहा मैं अपने जीवन में कुछ ऐसा बनना चाहता हूं कि मेरा नाम पंडित अपनी विद्वत्ता के क्षेत्र में अद्वितीय हो मैं उस दरिद्रता को करोड़ों मीलों दूर देखना चाहता हूं जो आपने भेजा है मेरे पिता ने बोला है आपने सदैव ऐसा जीवन जिया है मेरे पिता ने दिया है मगर ऐसा जीवन मैं नहीं जी सकता .आप अत्यंत विद्वान और श्रेष्ठ हैं अतः आप यह बताइए मैं दरिद्रता को कैसे ठोकर मारो दरिद्रता किस प्रकार मेरे सामने गिड़गिड़ाए. किस प्रकार में लक्ष्मी को अपने घर में बुला सकता हूं .क्योंकि मैं इस प्रकार जी ही नहीं सकता. नहीं जीवन व्यतीत कर सकते .ने कहा इसके लिए तुम्हें गुरु की शरण में जाना होगा उनके पास रहना होगा उनकी सेवा करनी होगी तुम्हारी सेवा से प्रसन्न होकर गुरु ही तुम्हें या ज्ञान दे सकते हैं और रावण गुरु की शरण में गया उसने गुरु की सेवा की जब गुरु ने पूछा तुम किस उद्देश्य से आए हो तो उसने कहा मैं जीवन में कुछ ऐसा करना चाहता हूं कुछ ऐसा बनना चाहता हूं जो आज तक आपने किसी को भी नहीं दिया हो मैं वह ज्ञान चाहता हूं गुरु ने कहा ऐसा मूल मंत्र मुझे ज्ञात है लेकिन मैं दे नहीं सकता क्योंकि मुझे यह मंत्र शिव के द्वारा प्राप्त हुआ है और अत्यंत महत्वपूर्ण है इस गोपनीय मंत्र को मैं नहीं दे सकता संभव ही नहीं है रावण ने कहा क्यों नहीं दिया जा सकता क्या कमी है मुझ में आप मेरी परीक्षा ले लीजिए यदि आपको मेरे अंदर योग्यता नजर आए तो फिर यह ज्ञान मुझे दीजिए और यदि मुझ में कमी है तो बताइए मैं उस कमी को ही दूर कर दूंगा गुरु ने कहा तुम्हें मेरी सेवा करते हुए उचित समय आने की प्रतीक्षा करनी घी और इस बीच मेरी कसम क्यों पर खरा उतरना पड़ेगा धीरे-धीरे समय व्यतीत होता गया कितने साल रावण ने गुरु की सेवा की तब जाकर गुरु ने अपने हर परीक्षा में बैठने के बाद रामगढ़ को मंत्र दिया जिसके मंत्र के जप हजारों सालों तक करने के बाद रावण ने जीत लिया अपनी दरिद्रता को अपने खानदान के ऊपर लगे भिक्षा मांगकर जीवन यापन करने अपनी दरिद्रता को अपने खानदान के ऊपर लगे भिक्षा मांगकर जीवन यापन करने का कलंक को और बन गया रामण एक महान सम्राट..

 

Hema Pandey

हेमा पांडे

 

 

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