प्लास्टिक बंद कितना सच, कितना सफल-नुजहत राना रूही

प्लास्टिक बंद कितना सच, कितना सफल-नुजहत राना रूही

प्लास्टिक युग में जी रहे हैं हम मानव । मानव की संख्या इतनी अधिक बढ़ गई हैं तथा प्रकृति का इतना दौहन हो चुका है कि प्रकृति इस समाज की विलाशिता एवं भोगवादिता की पटरी चढ़ी गाड़ी की गति पर नियंत्रण लगाने में स्वयं को अवरोधित महसूस कर रही है। मनुष्य स्वयं अपनी आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए उठ खड़ा हुआ ।कैसे? प्लास्टिक का निर्माण कर । प्लास्टिक है क्या ? मनुष्य का एक अविष्कार । एक अथक प्रयास का परिणाम ।निरिक्षण, सर्वेक्षण,अवलोकन,कल्पना,चिंतन, प्रयोग का मिश्रित प्रयास का फल । मनुष्य ने अपने बुद्धि के सही प्रयोग से यह सिद्ध कर चुका है कि वह चाहे तो कई वस्तओं का निर्माण कर सकता हैं । यह प्लास्टिक रसायनिक तत्वों का मिश्रण है । एक ऐसा रेशा है जिससे कई चीज़ें बनाए जा सकते हैं । फिर मनुष्य ने इस रेशे से अनेक चीज़ों को गड़ढ डाले, अपने जरूरतों के अनुरुप । तो यह अर्थ यहाँ पर यह भी निकलता है कि मनुष्य अपने अवश्यकताओं से वशीभूत होकर वस्तुओं का निर्माण और संहार भी कर सकता है ।
प्लास्टिक एक रसायनिक पदार्थ जिसका प्रकृति सामान्य रूप से क्षरण नहीं कर पाती है ,इसलिए आज वातावरण के चहु ओर इन से निर्मित वस्तुओं ढेर लग गए हैं । जो प्रकृति के सामान्य परिक्रिया के मार्ग में एक बड़ा अरचन है ।इस परिस्थिति के लिए हम स्वयं जिम्मेवार है । आज हम इससे छुटकारापाने का प्रयास कर रहे हैं । सवाल यह उठता है कि हमारा प्रयास कितना सार्थक है। सार्थकता किसी प्रयास को तभी मिलती है जब आवाम इसके हानिकारक पहलुओं को समझे,अपने तनिक निकटवरती लाभ से ऊपर उठ कर सोचे और प्रयास करें । यदि इस दृष्टि से देखेतो हमें पता चलता है कि देश के कर्णधार आवाम में इस मानसिकता को पूरी तरह से तैयार करने में असफल रहे हैं और न ही इसका कोई उससे सस्ता विकल्प प्रदान कर पाए हैं ।इसलिए यह बंद नहीं हो पा रहा है ।

 

नुजहत राना रूही

सऊदी ,अरब 

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