प्यार -हेमा पांडे

प्यार -हेमा पांडे

प्यार शब्द ही एक छोटा सा शब्द है. लेकिन देखने में .क्योंकि इस शब्द की महत्ता इतनी है कि लिखने के लिए शब्द कम पड़ जाए .प्यार तो वह एहसास है जिसने खोने के बाद आदमी अपने आप डुबता चला जाता है. प्यार करने की कोई उम्र नहीं होती यह बात सच है. प्यार कभी भी किसी से, कहीं पर भी हो जाता है. प्यार अमीरी और गरीबी में कभी फर्क नहीं करता .प्यार सुंदरता भी नहीं देखता. बस हो जाता है. आज की युवा पीढ़ी प्यार को एक हवस बना कर प्यार शब्द को बदनाम कर रहे हैं .सच कहे तो प्यार दो शरीर का नहीं बल्कि दो दिलों का मिलन होता है दो आत्माओं का मिलन होता है पर आज के इस दौर में प्यार होता ही कहां है. होता भी है तो बहुत कम. हर आदमी अगर अपने अंदर झांक कर अपनी आत्मा से पूछो अपने दिल को टटोले. तो उसे पता चलता है कि उसने अपनी जिंदगी में एक बार किसी न किसी से तो प्यार किया ही होगा चाहे वह 1 महीने का 1 हफ्ते का ही क्यों ना हो हमें प्यार को प्यार ही रहने देना चाहिए प्यार का हवस का नाम देकर प्यार जैसे महान शब्द को बदनाम नहीं करना चाहिए .प्यार के उदाहरण लैला मजनू हीर रांझा जो प्यार के लिए अपनी जान देकर इतिहास के सुनहरे पन्नों में अमर हो गए .आजकल के युवा पीढ़ी कॉलेज में ऑफिस में हर जगह लड़की देखी नहीं कि प्यार हो जाता है 1 साल 1 महीने में 1 हफ्ते में शारीरिक संबंध बनाकर मन भी उब जाता है. और फिर किसी दूसरे की तलाश तीसरे की तलाश चौथे की तलाश .यह तलाश उम्र भर चलती रहती है .कभी न पूरी होने वाली है तलाश आदमी को अंदर से खोखला बना देता है प्यार का एहसास एक से होता है हजारों से नहीं .आज भी हमारे यहां प्यार को लेकर कई सारी फिल्में बनी है जो अच्छी खासी कमाई हुई हुई है .जिससे आज की जो फिल्में बन रही है और फिर भी परिवार के साथ बैठकर देखने में भी शर्म आ रही है .हमारे हिंदुस्तान में सभी कुछ इस तरह नंगा करके दिखाया जा रहा है लड़कियां उसे फैशन मान उस पर आगे भी बढ़ रही है.. ऐसे को हमें रोकना चाहिए ताकि हमारी बेटियां प्यार के नाम पर गलत रास्ता न चुने इससे उनका भविष्य खराब न हो..

 

 

हेमा पांडे

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