प्यार में इतना दर्द और अन्ततः धोखा क्यों-गुंजेश शर्मा

प्यार में इतना दर्द और अन्ततः धोखा क्यों-गुंजेश शर्मा

ये प्यार शब्द आज से नही जबसे मनुष्य ने इस पृथ्वी पर जीना प्रारंभ किया तबसे इस शब्द को समझ रहा है।
अगर हम इतिहास की माने तो बात बात अलग है कि उस समय लोग बहुत ही मूर्ख थे और वो शब्दो के मतलब से पड़े थे। थे लेकिन फिर भी प्यार शब्द कोई शब्द नही जो इसका मतलब निकल पाए।
क्योंकि प्यार एक भाव है प्यार एक भावना है। ये शब्दो से पड़े है। ये शब्द रहे न रहे फिर भी लोग सदियो से प्यार को महसूश करते आ रहे है।
प्यार एक बहुत से भावो का संग्रह का नाम है।
प्यार का मतलब पवित्रता,ममता,निष्ठा,सादगी,ईमानदारी,भोलापन से है।
लेकिन इस बदलते परिवेश में बहुत कुछ बदल गया है। हम सब कुछ खोते चले जा रहे जो सही है ।हम अपनी दर्द भरी कहानी खुद लिखते है और हम दूसरे को दोषी ठहराते है।आजकल हमलोग सभी लोग एक 12 साल का बच्चा से लेकर 50 -60 साल तक का आदमी प्यार कर रहे है। शादी होने के बावजूद भी।
लोग वासना से भरे है और वो अपने संबंध को प्यार का नाम दे रहे है।

लोग हमेशा से प्रश्न करते आ रहे है कि आख़िर
मेरा प्यार सफल क्यों नही होता?
हमने तो इतनी सच्चाई से इश्क़ किया फिर भी मुझे दर्द मिला?
तो पहले तो ये सिद्ध करो तुम की तुम जिस संबंध का नाम प्यार दे रहे हो वो प्यार ही है या कुछ और है।
फिर आप ये नही सोचोगे ,की आख़िर इसका कोई instrument भी है क्या?
अगर नही है तो हम कैसे जाने की हमारा ये प्यार ही है या कुछ और है।हम कैसे सिद्ध कर?
फिर बहुत लोगो का कहना होता है ,मुझे अपने प्यार को सिद्ध करने की क्या ज़रूरत?
हम तो बस प्यार करते है।मुझे प्यार हो गया और यही प्यार है।
या कुछ ऐसे भी लोग होते है जो कुछ तर्क लेकर आते है और तुलना (compare) करके अपने प्यार को दूसरे के प्यार से सिद्ध करना चाहते है।
फिर घुमा कर वही बात आई कि तुम जिसे प्यार कह रहे हो , तो प्यार है क्या?
और अगर तुम जिसे प्यार कह रहे हो वो प्यार ही है या कुछ और?
फिर लोग कहते है कि प्यार क्या है?
इसको तो करने से ही पता चलेगा !
ठीक है करने से पता चलेगा ,तो फिर प्रश्न आता है।
आप प्रेम करोगे तो उसके लिए कोई रास्ता तो होगा जहा से आप चलकर प्यार तक जाओगे।
तो लोग कहते है रास्ता का क्या जी जो रास्ता पर चल दिये वही प्यार का रास्ता है ।
अच्छा फिर आगे क्या होगा उस रास्ते पे,ये तो किसी को नही मालूम ।क्योंकि जिस रास्ते पर हम चल रहे है उसका मुझे कोई अता पता नही। फिर आगे चलकर इसमे कुछ आपके मन के विपरीत हो जाये तो इतना प्रश्न क्यों?इतना दर्द क्यों?
फिर हम आते है अपने सवालो पर हाँ सब ठीक ऐसे ही होता है प्यार में सोचो कुछ होए कुछ ।
प्यार तो आनंद के लिए किया था।
क्या आनंद मिला।
फिर हम दूसरे लोगो को बताते है अपनी दर्द की कहानी। और वो दूसरा जो सुनने वाला है उसकी भी ऐसी ही हालात है। वो अब मुझे ये समझायेगा की
क्या करोगे यही प्यार है। सबके साथ ऐसा ही होता है।
प्यार तो आनंद के लोये किया था ,यँहा तो रोज़ का झगड़ा लड़ाई,दर्द ही दर्द भड़ा है। कभी कभी 1 आध घण्टे के लिए प्यार का अनुभव हो या आनंद आये फिर वही लड़ाई । नाटक ।
और ये कितनी अजीब बात है -जब हमको पता होता है कि हम कितने दर्द झेल रहे फिर भी हम नही सोचते कि हमने जो रास्ता आनन्द के लिए चुना था इसमे इतना दर्द क्यों? ये तो सबको पता है कि प्यार शब्द आत्मा के आनंद के लिए बना है ।फिर भी इतना दर्द है इसमें तो ये हम प्यार नही कर रहे है।
लेकिन कौन ये सब जाने जी ,मुझे तो बस ऐसे ही नरक वाली ज़िन्दगी पसंद है। मरीजो वाली।
लेकिन लोग प्रश्न नही करते। और करते भी है तो वैसे ही लोगो से जिनकी हालात भी आप जैसे ही है। सब का प्यार ऐसा ही चलता है।
लेकिन कुछ लोगो को तभी भी सच को जानने की अभिलाषा रहती है है।
तो वो इसको समझना चाहते है।
फिर वो कहते है हा आख़िर हम कैसे जाने की प्यार का रास्ता क्या है?

अगर हम वेद -शात्र की माने तो उसमें प्यार क्या है ,इसको जानने और समझने के लिए 7 शब्द दिए गए है।
शास्त्र -वेद का ये मत है कि प्यार क्या है हम इसको नही बता सकते। क्योंकि हमारा शब्द प्यार तक नही पहुंचता। लेकिन अगर कोई शब्द है जो प्यार के निकट पहुंच सकता है ये जानने के लिए हमारा प्यार कैसा है तो हम इसका वर्णन करते है।
1) रूपरहितम
2) गुणरहितम
3) सूक्ष्मतरम
4) वर्धमानम
5) कामनारहितम
6) प्रेत्यकछनम
7) अनुभवरूपम
मतलब प्यार में हमे ये नही देखना की हमारा प्रेमी कैसा हो। कैसा दिखता हो,उसका रंग काला की उजला।कुछ मतलब नही हमको। उसमे क्या गुण है क्या उसका status है ,उसके पास कितना मकान है दुकान है पैसा है खेत है। और प्यार वैसा हो हर छन बढ़े,हर दिन बढ़ता ही जाए। प्रेमी या प्रेमिका की याद हमेशा मन मे रहे। मेरी कोई कामना,इच्छा न हो हम हमेशा उसी के खुशी के लिए सोचे। जिसमे वो खुश मुझे वो करना है। और प्यार वो जिसको हम अनुभव से जाने।
लेकिन हम कैसे प्यार करते है? अरे पहले ये देखो वो कितनी सुंदर है। अगर सुंदर है तो उसके पास कोई गुण भी या बस ऐसे ही चेहरा है।और अगर गुण भी है तो ये समझो कि उसके पास कितना मकान पैसा खेत ये सब है।
फिर हम अपने प्रेमी को याद करने के बजाए क्या करते है ,जरा दुनिया घूम आओ जी आज तो मेरे प्यार ने मेरा दिमाग खराब कर दिया है। tension हो गया है।चलो कही relax हो ले। वो सब कुछ भूल कर।
प्यार प्रेत्यक छन बढ़ने के बजाए ये क्या हो रहा है।
हम तो पहला कदम से ही गलती कर दिए तो क्या अब कही सही हो पायेगा।
शर्ट का एक बटन गलत लगाओ तो सारा गलत लगते चले जाता है। वैसे ही यहा होता चला जायेगा।
ये जो हम कर रहे है ये कोई प्यार व्यार नही है।
ये एक ड्रामा है। और कुछ नही। ये ड्रामा आज इसके साथ करो। कल इसको छोर को किसी और के साथ करो। कुछ नही बदलने वाला ।

लेकिन इस पृथ्वी पर सभी धर्मों के लोग रहते है। कोई हिन्दू है कोई मुस्लिम है कोई सिख है कोई ईसाई है।कोई आस्तिक है कोई नास्तिक है।
लेकिन कोई वी धर्म से हो समाज से हो।
प्यार की ज़रूरत तो सबको है ही।। फिर मुस्लिम धर्म वाले सिख धर्म वाले नास्तिक लोग तो ये कहेंगे कि ये तो हिन्दू धर्म शास्त्र में लिखा है । मेरे धर्म शास्त्र में तो ऐसी इसकी कोई चर्चा नही है। तो फिर हमारे साथ ये धोखा और दर्द क्यों हो रहा है।
ये प्रश्न भी जायज है।
अगर मेरी मानो तो प्यार क्या है इसका अनुभव जानने और आनंद पाने का एक ही रास्ता है। केवल एक ही।
ध्यान दीजिए केवल एक और इसके अलावा न कोई रास्ता बना है और न बनेगा !

अगर आप सच्चा प्यार पाना चाहते है तो आपको इस दुनिया संसार को भूलना पड़ेगा।
ध्यान दीजिय इस संसार को छोड़ना नही है रहना यही है लेकिन इसको भूलना पड़ेगा। और कोई रास्ता नही है।
अगर आप किसी को प्यार करते है तो भूल ही जाइये की इसके अलावा कोई नही मेरा इस संसार मे। केवल आप और आपका प्रेमी/प्रेमिका।
भूल ही जाइये दोस्ती ,यारी, दुनिया,दुनियादारी,मकान,दुकान हर चीज़ को।
क्योंकि जहां time hai वही space बन जाता है।
आप दुनिया के लिए time दिजियेगा आपका मन उतना जगह बना लेगी आपके दिमाग मे। फिर उधर space कम होगा इधर बढ़ना सुरु।धीरे धीरे प्यार खत्म दर्द बढ़ना सुरु।
आप ये भूल जाइए की हमको अपने प्यार को सिद्ध करना है। किससे सिद्ध करना अब जब कोई हमारे दोनों के अलावा है ही नही तो।
प्यार में लक्ष्य नही बनाना ,लक्ष्य क्यों बनाना किसके जब हमदोनो ही है तो लक्ष्य क्या!
आप
देखेंगे कि लोग प्यार करते है और अगर गलती से उनको शादी भी हो गयी तो। 95% केस में ऐसा होता है कि शादी बाद उनकी तालाक हो जाती है।
क्यों ,क्योंकि उनके प्यार का लक्ष्य था की हम शादी करके खुशी से रहेंगे।
शादी हुई खुशी खत्म। क्यों ?
क्योंकि अब शादी हुई तो चलो जी अब तो ये मेरी है ही अब जरा दुनिया मे घूम आये बहुत दिनों से इधर बंधे थे अब जरा दुनिया से रिस्ता जोड़े। फिर उधर time दिए तो इधर तालक होना है। क्योंकि अब न वो समय रहा न प्यार रहा।

याद करिये हम प्यार में झगड़ते क्यों है?
क्योंकि हम दुनिया को लाते है बीच मे ,आज मेरा दोस्त ऐसा,मेर भी वैसा,ये वैसे, मेरे दोस्त का प्रेमी देखो उसको ring दिया तुम तो मुझे प्यार नही करते ये ड्रामा वो क्या नाटक है ये।
और कब तक चलेगा ये।।
देखिए जब कोई भगवान को पाना चाहता है तो मकान दुकान माँ-बाप दुनिया या दुनियादारी सबको सबकुछ छोड़के कही और जंगल चला जाता है।
फिर जाकर कही वो बुद्ध और महावीर बनता है।
कितनी हिम्मत करके वो सबकुछ छोड़ता होगा।
लेकिन हमें यहां तो कुछ छोड़ना भी नही।बस भूलना है।
हम ये सोचेंगे कि अगर इस संसार को भूल कर तब जाएंगे प्यार करने फिर तो आप इस संसार को नही भूल पाइयेगा। क्योंकि ये सारा संसार माया से भरा हुआ है।
आपको अपना सारा समय प्यार पर देना होगा इधर आप सब कुछ बिल्कुल आसानी से भूल जाईयेगा।

सोचिये आख़िर प्यार में इतना दर्द और धोखा क्यों मिलता है?
क्योंकि लोग यहाँ आपको बाद में परेशान करेंगे और दर्द देंगे।जब उनको लगेगा कि इनका प्यार पक्का है तभी।
लेकिन इससे पहले आप खुद के ही प्यार में नफरत और दर्द महसूश करेंगे।
आप एक दूसरे को दोषी ,मूर्ख,कुरूप,धोखेबाज़,बताएंगे?
क्यों क्योंकि आप इस संसार मे किसी और को निर्दोष मान रहे है।
आप किसी और को ज्ञानी मान रहे है ।आप आज किसी और सुंदर आदमी को देख लिया।
आज इसको छोड़ेंगे आप कल किसी और से प्यार कल उसको छोड़ेंगे परशु किसी और से प्यार।
आदमी बदलने से क्या होगा। आपको प्यार चाहिए या आदमी।
ये सारी बाते प्यार को गंदा करेगी और एक ऐसी रास्ते पे ले जाएगी जिसका अंत सिर्फ दर्द से भरा होगा।
सालो बीत जाएगा मरने का समय आ जायेगा लेकिन आप को सच्चा प्यार कभी नही मिलेगा।

लेकिन समय आ चुका है, एक नई सोच के साथ सबकुछ समझकर एक आनद भरे रिस्तो की सुरुआत करने की।

 

 

 

 

गुंजेश शर्मा

मुजफ्फरपुर, बिहार 

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