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राज्यपाल की नियुक्ति, कार्यकाल, योग्यता और शक्तियांः-वीरेंद्र देवांगना

राज्यपाल की नियुक्ति, कार्यकाल, योग्यता और शक्तियांः
संविधान के मुताबिक, प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल होगा, जिसकी नियुक्ति प्रधानमंत्री से विचार-विमर्ष के उपरांत राष्ट्रपति द्वारा किया जाएगा।
उसका कार्यकालः-राज्यपाल पांच वर्ष की अवधि के लिए नियुक्त होगा, लेकिन राष्ट्रपति उसे किसी समय भी पद से हटा सकता है या कार्यकाल बढ़ा सकता है।
उसकी योग्यताः-वह भारत का नागरिक हो. उसकी 35 वर्ष की आयु पूरी हो चुकी हो।
उसकी शक्तियांः-वह विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल के नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करता है और शपथ दिलवाता है। विधानसभा में किसी एक दल को बहुमत प्राप्त न हो, तो दो या उससे अधिक दल के गठबंधन के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकता है। इसे मिली-जुली सरकार या संयुक्त दलीय सरकार कहा जाता है।
वह चुनाव के पश्चात प्रथम अधिवेशन बुलाता है। इसके बाद प्रत्येक वर्ष आयोजित होनेवाले राज्य विधानमंडल का पहला अधिवेशन अपने भाषण से शुरू करता है। वह समय≤ पर सदन या सदनों की बैठक बुलाता है तथा उसका सत्रावसान करता है।
वह यह भी ध्यान रखता है कि राज्य विधानमंडल की अंतिम बैठक और अगले सत्र की पहली बैठक के बीच 6 माह का समय तो नहीं बीता है। राज्यपाल किसी समय सदन या सदनों को संबोधित कर सकता है या उन्हें अपने संदेश भेज सकता है।
राज्य विधानमंडल द्वारा पारित सभी विधेयकों की स्वीकृति राज्यपाल से ली जाती है। वह किसी विधेयक पर राष्ट्रपति से परामर्ष भी ले सकता है। जब विधानसभा का अधिवेशन नहीं चल रहा हो, तब राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है।
किसी धन विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत करने से पहले राज्यपाल की अनुमति आवश्यक होती है। राज्य कानून के अधीन दी गई सजा को राज्यपाल कम या माफ कर सकता है। वह विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति भी होता है।
वह राज्य के उच्चाधिकारियों की यथा-लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, राज्य का महाधिवक्ता, मुख्य सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग के अध्यक्ष और सदस्य, राज्य सूचना आयोग के अध्यक्ष व सदस्य, सरकार के परामर्श से लोकसेवकों आदि-इत्यादि का नियुक्तिकर्ता भी होता है।
वह रिक्त पद के अनुसार, आंग्ल-भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों को भी मनोनीत कर सकता है।
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