सार्थक सोच- हेमा पांडे

सार्थक सोच- हेमा पांडे

अपने मम्मी पापा के साथ बैठकर भाई बहन दोनों भोजन कर रहे थे .पापा ने अपने बच्चों से पूछा आप दोनों की परीक्षा कैसी चल रही है. दोनों ने उत्तर दिया ठीक चल रही है साथ ही बहन ने कहा पेपरों के पश्चात हम किसी हिल स्टेशन पर जाकर छुट्टियां मनाएंगे. इतने में साथ बैठा भाई बोला नहीं. इस बार हम किसी ऐतिहासिक स्थल पर घूमने जाएंगे .दोनों के विचार भिन्न थे इसलिए वह दोनों अपनी अपनी बात पर अड़े थे .पापा ने कहा कल तुम दोनों की परीक्षा है इसलिए तुम जाकर अपने अपने पेपर की तैयारी करो. यह बात तो फिर भी हो सकती है .अगले दिन दोनों पेपर देने के लिए घर से निकल पड़े भाई बहन दोनों ने रात को पढ़ाई तो की परंतु उनके मन में अपनी छुट्टियां मनाने का ढंग को लेकर उत्सुकता अधिक थी कि किस तरह से मेरी बात पापा मान ले दोनों सोचते रहे कि इस बार तो पापा को मेरी बात माननी ही चाहिए इसीलिए दोनों रात में सो भी नहीं पाए और एक दूसरे के प्रति विपरीत सोच से भी नहीं बच पाए दोनों अपने अपने परीक्षा तक पहुंच गए और पेपर के इंतजार करने लगे जैसे ही पेपर मिला अरे यह क्या बहन मन में बोली कि किसी ऐतिहासिक स्थल की यात्रा का वर्णन करो. आज बहन ने किसी ऐतिहासिक स्थल की ना तो जानकारी ली थी और ना ही उसके बारे में पढ़ा था उसने किसी तरह से बाकी प्रश्न हल किए और धीरे-धीरे सोचने लगी कि भाई शायद ठीक ही कह रहा था
.. अगर उस समय उसका विरोध ना करती तो अवश्य वह किसी ऐसे ऐतिहासिक स्थल के बारे में सुनाता और बताता तो मेरा प्रश्न पत्र का कार्य भी आसान हो जाता मन ही मन में वह अपने भाई को अच्छा कहने लगी और उसके प्रति सकारात्मक भाव से धन्यवाद किया भाई ने भी पेपर किया और घर आते आते घर आते आते सोचने लगा मैंने बहन की बात क्यों नहीं मानी बेकार ही उसकी बात का विरोध किया अगर मैं बहन की बात मान लेता तो क्या फर्क पड़ जाता दोनों ने घर में इकट्ठे ही प्रवेश किया .और दोनों ने एक-दूसरे का मुस्कुराकर अभिवादन किया और एक साथ बोल पड़े आप जैसा कहते हो मैं वैसा ही मान लूंगा अथवा मान लूंगी यहां पर गौर करने योग्य बात यह है कि जब भी हमारे मन में किसी के प्रति उचित और शुभ विचार आते हैं और उसके पास वैसी ही भावना लेकर पहुंचते हैं तो उसकी भावना में भी परिवर्तन ला देते हैं वह भी अपने श्रद्धा भाव से प्रत्युत्तर देता है .इसी तरह हम किसी को भी जो हमारे मित्र नहीं भी हैं या जिनसे हमारा मनमुटाव है उनको भी अगर हम हृदय से प्रेम से युक्त होकर शुभ भावना अपने मन से भेजेंगे तो वह उसके पास जाकर उनका भी हृदय परिवर्तन कर देंगी इस प्रकार उनके अंतर्मन से सभी अनुचित भाव समाप्त हो जाएंगे अंततः जीवन जीने का नया अध्याय प्रारंभ हो जाएगा .प्यारे साथियों हम भी इस युक्ति को अपनाकर देखें और अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाएं.

 

     

 

 हेमा पांडे

 

 

 

 

 

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