शिक्षित बेरोजगारी-आनंद मिलन

शिक्षित बेरोजगारी-आनंद मिलन

आज के दौर में युवा वर्ग कामयाब तो होना चाहता है। लेकिन कामयाबी किसी उड़ती हुईं चिड़िया का नाम नहीं, जिसे जब चाहा दाना डालकर जाल बिछाया और एक दो घंटों के अंदर पकड़ लिया। हर नौजवान युवक के दिल में एक ही तमन्ना होती है कि उसके पास एक कार हो, एक अच्छा सा मकान हो, जेब में अच्छा सा ऐपल मोबाइल फोन हो, परंतु इस तरह के सपने घूमते हुए पंखे के नीचे गद्दीदार कुर्सी पर बैठकर देखने में अच्छे लगते हैं या फिर रात के ख्वाब में ।
सपना सचमुच हकीकत में बदले, इसके लिए जरूरी है कि हर युवक रात के बजाय दिन में सपना देखें, बंद आँखों की बजाय खुली पलकों से सपना देखें, रात में चारपाई की बजाय दिन की कड़ी धूप में खड़े होकर सपना देखें।
दिन में सपना देखना अजीब सा लगता है, परंतु यही कड़वी सच है। यह बात सत्य है कि इंसान को भाग्य से ज्यादा और समय से पहले कुछ नहीं मिलता है। परंतु इसका मतलब यह नहीं हुआ कि हम हाथ – पर – हाथ रखकर इंतजार करते रहें। बहुत सारे लोग समय का इंतजार करते रहते है।
लेकिन उन्हें पता ही नहीं चलता कि उनके सामने से होकर समय कब गुजर गया और इस तरह एक दिन पूरी जिंदगी गुजर जाती है। स्कूल कालेज की पढ़ाई युवा वर्ग को वेतनभोगी तक लाकर छोड़ देती है। जिससे उनका पहचान गाँव या तहसील तक पहुँच पाता है।
हर क्षेत्र में खासकर सरकारी विभागों में नौकरी के लिए पद संख्या सुनिश्चित है। लिहाजा शिक्षित बेरोजगारी आज के समय भारत में शुरसा की तरह मुँह फाड़े खड़ी है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी अपने शासनकाल में अपने भाषणों के दौरान बार बार कहा करते थे कि सरकारी नौकरी कहाँ है ? शिक्षित बेरोजगार युवा सरकारी नौकरी के भरोसे ना रहे ? इसलिए जरूरी है कि व्यवसायिक और तकनीक शिक्षा पर युवा वर्ग विशेष ध्यान देकर अपना सपना साकार करें और गाँव तहसील में नहीं बल्कि राज्य देश व विदेश में अपना पहचान बनाए। जिस तरह से हमारे शहर, बाजार और पढ़ाई हाईटेक या स्मार्ट हो रहे है। उसी तरह से खेती और स्वरोजगार स्मार्ट या हाईटेक हो रहे है। लेकिन पढ़े लिखे बेरोजगार युवा खाली बैठें रहते है। मगर खेती या स्वरोजगार को नहीं अपनाते है ?
ये सच है कि पढ़ाई पर लाखों रूपया खर्च कर खेती या स्वरोजगार कियो करें ? लेकिन रोजगार बिना सब पढ़ाई बेकार ?
इसके अलावा भी स्वरोजगार के अंतर्गत फोटोग्राफी, फैशन डिजाइनर, होटल मैनेजमेंट, साफ्टवेयर डिजाइनर, पेंटिंग, स्केचीगं, राइटिंग, स्पोर्ट्स, मूजीक टीचर, युब – टूब जैसे बहुत से क्षेत्र है जहाँ शिक्षित बेरोजगार युवा खुद का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
भारत सरकार या राज्य सरकार की तरफ से बहुत सारे योजना है जो खेती या स्वरोजगार संबंधित मदद करती है जिससे शिक्षित बेरोजगारी कम किया जा सके।
सच पूछिए तो आज का शिक्षित युवा वर्ग अपने अंदर हीन भावना को पैदा कर काम करने की चाहत को बुझा रहे हैं जो जीवन नाम के इंजन को आगे धकेलने के लिए भाप पैदा करता है। शिक्षित बेरोजगार युवा वर्ग के समस्याओं का समाधान कोई आसान से आकर नहीं करेगा ? बल्कि वे खुद स्वयं का उद्धार करें।
किसी विद्वान ने सच ही कहा है — वह काम करो जो तुम्हें पसंद हो या जो काम करो उसे पसंद करो।

।। समाप्त।।

      Anand Milan

  आनंद मिलन।

 

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