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संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस पर विशेषःः अंतरराष्ट्रीय न्यायालय-वीरेंद्र देवांगना

संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस पर विशेषःः
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय::
संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रमुख न्यायिक संस्था को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय कहा जाता है। इसका गठन जून 1945 में हुआ, जो 3 अपै्रल 1946 से अपना काम करना आरंभ किया।
इसका मुख्यालय नीदरलैंड के हेग शहर में है। यूएन से जुड़े छह में-से यह एकमात्र संगठन है, जिसका मुख्यालय अमेरिका के न्यूयार्क में स्थित नहीं है।
यूएन के सदस्य देशों के बीच उत्पन्न विवादों, जिसमें सरहद से जुड़े मामले, नदीजल विवाद, युद्ध, युद्धबंदी, शरणार्थी, जासूसी (असली या नकली) को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत समाधान करना इसका मकसद है।
अदालत में कुल 15 जज होते हैं, जिन्हें यूएन महासभा और सुरक्षा परिषद द्वारा नौ साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है। इसमें से प्रत्येक 3 वर्ष बाद 5 न्यायाधीश अवकाश ग्रहण करते हैं। इसमें यह शर्त है कि दो न्यायाधीश एक ही देश के नहीं हो सकते हैं।
मौजूदा न्यायाधीश अपने में-से एक अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का चुनाव तीन वर्ष के लिए करते हैं। न्यायालय की कार्रवाई संचालन का कोरम न्यूनतम 9 न्यायाधीशों का है।
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की कार्यकारी भाषा यून की तरह अंग्रेजी व फ्रेंच है। यूएन चार्टर के मुताबिक, सुरक्षा परिषद को शिखर अदालत का फैसला लागू करवाने का अधिकार है। अर्थात इसके फैसले पर कार्रवाई सुरक्षा परिषद को करनी होती है।
कोई देश यदि सर्वोच्च अदालत के फैसले को लागू नहीं करता है, तो पीड़ित देश सुरक्षा परिषद में इसको लागू करने के लिए अपील कर सकता है।
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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