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संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस पर विशेषःः फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स-वीरेंद्र देवांगना

संयुक्त राष्ट्र संघ दिवस पर विशेषःः
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स::
जी-7 देशों की पहल पर 1989 में गठित फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स-एफएटीएफ एक अंतर-सरकारी संगठन है। गठन के समय इसके सदस्य देशों की संख्या 16 थी। 2016 में इसकी संख्या बढ़कर 37 हो गई। भारत भी इस संस्था का सदस्य देश है।
शुरूआत में इसका मकसद मनी लांडरिंग पर रोक लगाना था, लेकिन 9/11/2001 को अमेरिका के वल्र्ड टेªड संेंटर पर हुए आतंकी हमले के बाद आतंकी संगठनोें पर वित्तपोषण भी इसकी निगरानी के दायरे में लाया गया।
एपीजी यानी एशिया पैसिफिक गु्रप इसकी क्षेत्रीय इकाई है। सुविधा के लिए इस अंतरराष्ट्रीय संगठन ने कई क्षेत्रीय इकाइयां गठित कर रखी है। इनमें आठ संस्थाएं प्रमुख हैं।
दो सूचीः एफएटीएफ दुनिया के उन देशों की दो सूची बनाती है, जो मनी लांडरिंग और आतंकी संगठनों को मिलनेवाले घन को रोकने या उसके खिलाफ कदम उठाने में पीछे रहते हैं। इसकी पहली सूची ग्रे और दूसरी ब्लैक कहलाती है।
निगरानी सूची में शामिल देशः एफएटीएफ की निगरानी सूची यानी ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान, घाना, पनामा, श्रीलंका, ट्यूनिशिया, बह्मास, बोत्सवाना, यमन, सीरिया, त्रिनिडाड व टोबैगो, इथोपिया और कंबोडिया हैं।
प्रतिकूल असरः पड़ोसी पाकिस्तान की बात करें, तो एफएटीएफ ने पाकिस्तान को गैरकानूनी वित्तीय लेन-देन, बाहर से आनेवाली फंडिंग को रोकने, एनजीओ के नाम पर काम करनेवाली एजेंसियों की गतिविधियों पर लगाम लगाने व पारदर्शिता लाने के लिए जिन 40 कार्यो की सूची सौंपी थी। इनमें से नौ को छोड़कर किसी में कोई कार्रवाई पाकिस्तान ने नहीं की। नौ में भी मामूली कदम उठाया गया।
इससे एशिया-प्रशांत गु्रप का कहना है कि पाकिस्तान को जिस श्रेणी में रखा गया है, उसमें संशोधन नहीं होना चाहिए।
23 अक्टूबर 2020 को एफएटीएफ ने अपने फैसले में पाकिस्तान को ग्रे सूची में यथावत रखे जाने की अनुशंसा की है। उसको फरवरी 2021 तक कार्रवाई करने का पुनः अवसर दिया गया है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही खस्ताहाल है। एक तो करेला, दूजा नीम चढ़ा के हालात हैं। यदि वह कालीसूची में डाला गया, तो उसके अर्थतंत्र की कमर टूट जाएगी। ब्लैक लिस्टेड होने से उसकी अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर इस प्रकार पड़ सकता है।
1. आईएमएफ, विश्वबैंक, एशियाई विकास बैंक सहित वैश्विक वित्तीय संस्थाओं से कर्ज मिलना कठिन हो जाएगा। वे इसकी साख गिरा सकती हैं।
2. विदेशी कंपनियों के लिए वहां निवेश करने की लागत बढ़ जाएगी। मूडी, एस एंड पी और फिच जैसी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां पाकिस्तान की रेटिंग गिरा सकती हैं। इससे निवेशक नहीं मिलेंगे। वे बिदकेंगे। इससे उसकी अर्थव्यवस्था बैठ जाएगी।
3. पाक का शेयर बाजार लुढ़क सकता है। वित्तीय अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो सकती है। चीन इस अवसर को भुनाते हुए निवेश कर मुनाफा कमा सकता है।
4. आतंकिस्तान का वित्तीय क्षेत्र ढह सकता है। 126 शाखाओंवाले सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बैंक स्टैंडर्ड चार्टर्ड सहित सिटी बैंक, ड्यूश बैंक अपना कारोबार समेट सकते हैं।
5. विदेशी लेनदेन और विदेशी मुद्रा प्रवाह में कमी के चलते पहले से ही आसमान छूता चालू खाता घाटा और बढ़ने की संभावना है।
6. वैश्विक बाजार से फंड का इंतजाम करने में झूठे पाक को नानी याद आ सकती है।
7. जो अर्थव्यवस्था 5 फीसद की दर से बढ़ायमान थी, जिसका लक्ष्य इस साल 6 फीसद था, वह गर्त में जा सकती है।
8. यूरोपीय मुल्कों को निर्यातित चावल, काटन, मार्बल, कपड़ा व प्याज सहित अनेक उत्पादोें पर विपरीत असर पड़ सकता है। घरेलू उत्पादकों की कमर टूटना संभावित है।
9. बीमा कंपनियां ज्यादा प्रीमियम लेने लगेंगी। लिहाजा बीमा कारोबार ठप होना संभव है। पाकिस्तान के निर्यातकों की बीमा लागत बढ़ सकती है।
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