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सपनों के दो रूप-चंदेल

दुनिया में बहुत सारे व्यक्ति सपने बनाते हैं या सजाते हैं ,वे वहीं सपना सजाते हैं, जिसके साथ में आगे बढ़ना चाहते हैं ,लेकिन सपनों के दो रूप होते हैं-
१ दृश्य स्वप्न
२ अदृश्य स्वप्न

दृश्य स्वप्न-
दृश्य स्वप्न ,जो सपना व्यक्ति अपने बचपन से देखता है जो उसने सजाए हैं| उसने यह निश्चय कर लिया है ,कि उसे वह सपना पूर्ण करना है और वह उस सपने को अपना लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ता है| उसे यह पूर्ण तः पता होता है, की उसे क्या क्या करना है, तथा अंत में अपना लक्ष्य (सपना)प्राप्त कर लेता है

       अदृश्य स्वप्न-
                         दृश्य स्वप्न तो व्यक्ति बहुत सजाते हैं या बनाते हैं ,लेकिन एक ऐसा सपना भी होता है जो बिना बनाएं बिना सजाएं पूर्ण हो जाता है उसे अदृश्य स्वप्न कहते हैं !

ऐसे बहुत सारे व्यक्ति होते हैं जिन्हें अपने भविष्य का कुछ पता नहीं होता उन्हें क्या करना है वह मालूम नहीं होता है, उनका कोई लक्ष्य नहीं होता है |वे कोई भी सपना नहीं सजाते हैं उसमें से कुछ व्यक्ति वहां पहुंच जाते हैं जहां बहुत लोगों को पहुंचना असंभव लगता है!
अदृश्य स्वप्न जिसे तकदीर भी कहते हैं !

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