स्त्री मनोविज्ञान की एक झलक-नुजहत राणा रूही

स्त्री मनोविज्ञान की एक झलक-नुजहत राणा रूही

प्रश्न यह एक उभरता है कि स्त्रियाँ श्रृंगार करना क्यों पसंद करती है ? जब इसके तह में जाकर देखी तो उत्तर प्राप्त हुआ पुरुष आकर्षण का पात्र बनने के लिए ।चिरकाल से यही इतिहास रहा है कि ऊसकी मूल भवना यही रहती कि वह पुरुष द्वरा स्वीकार कर ली जाए।
वह गीत गाती है तो पुरुष विराह में ,उसके प्रेम में । उसके लिए अपने को ढकती और उधेरती भी है ।उसके चारों ओर का वृत्त पुरुष में ही आकर क्यों समाप्त होती है ? क्या पुरुष के तुलना में वह अधिक कामआतुर होती है ? क्या पुरुष आकर्षण की संवेदना ही उसके मनोविज्ञान इतना उलझा दिया है ?
शायद पुरुष भी स्त्री की इस कमजोरी को जानता है और इसे वह अपने स्वार्थ सिद्धी के लिए प्रयोग करता आ रहा है । बारबार वह इस चतुर पुरुष द्वारा छल लिए जाती है । पर फिर भी वह उसके मोह जाल से निकल नहीं पाती है । पुरुष स्त्रियों को कई रुप में छलता है । कभी पिता बन, कभी भाई, कभी पति तो कभी बेटा बन ।पुरुष इस धरति का सबसे चतुर अंश है और स्त्री सबसे मूर्ख । वह आज तक अपने लिए जीना नहीं सीखी । वह जीती है तो पिता के आज्ञा में,वह जीती है भाई के स्नेह में, वह जीती है पति के गुलामी में । इस तरह वह अपने को लुटाती जाती है । और पुरुष एक लुटेरे की तरह सब कुछ लुटता चला जाता है और हट्टास लगाता जाता है । अपनी मनमानी करता चला जाता है । स्त्रियों का चिरहरण करना उसका बाँए हाथ का खेल हो गया है वह तो उसकी अंतरआत्मा तक हरण कर लेता है । मूर्ख स्त्रियाँ उसकी समीपय की अभिलाषा में अपना सब कुछ होम कर देती है । शिक्षा के इस दौड़ में भी पुरुष के काम बाण का शिकार होने के लिए अपने शरीर के वसन को कम करती जा रही है ।और स्वयं को काम प्यासु नेत्र का निवाला बना रही है । बड़ी विचित्र चरित्र की स्वामिनी होती है यह स्त्रियाँ ।इसलिए इनका मनोविज्ञान इतना उलझा हुआ है । वास्तव में अधिकाश स्त्री कुण्ठा में जीवन यापन करती है । उसका आदिकाल से ही यह ध्येय रहा है कि वह सदैव पुरुष के लिए एक आकर्षक बिंदु बनी रहे ।चाहे वह चहरदिवारी में घिरी घर की दहलीज की आँखें हो या फिर सड़क पर विचरती आँखें । चाहे स्वेत वस्त्र धारण करे या फिर रंगीन चुलबुले वसन उद्देश्य वही ।
ऐसे में आपस में प्रतियोगिताएँ जितनी अधिक है उनका आपस में उलझण भी बेपनाह है । एक दूसरे से इर्ष्या आम बात है । वह अपने से ऊपर नारी को सहन नहीं कर पाती । उसे पुरुष के आगे निचा दिखाने के लिए कई तरह की प्रपंच रचती रहती है । इसलिए तो सास-बहू, ननद-भाभी,जेठानियों के झगड़े आम हैं ।
इस विचित्र मनोदसा का निर्माण स्त्रियों कहाँ से होता है ? अगर इस पर विचार किया जाए तो ऐला मालूम पड़ता है कि जन्मजन्मातर से यह ज्ञान उसे अपनी माँ के गोद, परिवार, परोस और समुदाय से प्राप्त होती है । क्योंकि उसे जड़ से जुड़ने की शिक्षा और ज्ञान नहीं दी जाती । उसे मिलती अमरवेल बनने की प्रथम शिक्षा ।

 

        नुजहत राना रूही

       सऊदी ,अरब 

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