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तीन तलाकः असंवैधानिक-4-वीरेंद्र देवांगना

तीन तलाकः असंवैधानिक-4
मुख्य बातेंः
1. तत्काल तीन तलाक देनेवाले पति को अधिकतम तीन साल की सजा और जुर्माना का प्रावधान
2. यह संज्ञेय तभी होगा, जब या तो पीड़िता या परिवार के सदस्य एफआइआर दर्ज कराएं।
3. तत्काल तीन तलाक संज्ञेय अपराध बना। यानी एफआईआर दर्ज होने के बाद बिना वारंट गिरफ्तारी संभव है। पुलिस नहीं दे सकेगी जमानत। मजिस्टेªट आरोपित को जमानत दे सकता है। जमानत तभी मिलेगी, जब पीड़ित महिला का पक्ष सुना जाएगा।
4. पड़ोसी या कोई अनजान शख्स केस दर्ज नहीं करा सकता।
5. मजिस्ट्रेट को सुलह कराकर शादी बरकरार रखने का अधिकार होगा।
6. फैसला होने तक बच्चा मां के संरक्षण में रहेगा। पति को देना होगा पत्नी को गुजारा भत्ता। यह रकम मजिस्टेªेट निर्धारित करेगा।
7. विधेयक तीन तलाक के मामले को सिविल मामलों की श्रेणी से निकालकर आपराधिक श्रेणी में डालता है।
8. यह कानून सिर्फ तलाक-ए-बिद्दत यानी एक साथ तीन बार तलाक बोलने पर लागू होगा। कोई मुस्लिम पति अपनी पत्नी को मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रानिक रूप से या किसी या अन्य विधि से तीन तलाक देता है, तो उसकी उद्घोषणा शून्य और अवैध होगी।
9. यह कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर तब पूरे देश में लागू हुआ था, लेकिन अनुच्छेद 370 की समाप्ति के उपरांत यह कानून जम्मू-कश्मीर राज्य और केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में भी समान रूप से लागू हो गया है।
उपसंहारः
बावजूद इसके, करीब 100 से अधिक पुरुषों की हेठी और हेकड़ी देखिए। इसका असर शैतानों पर नहीं हुआ। वे अब भी तीन तलाक कहकर पुरुषवादी अहम साबित कर महिलाओं का जीना हराम करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। मानसून$बजट सत्र में भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने तीन तलाक विधेयक का समर्थन करते हुए इसी मानसिकता पर कटाक्ष किया, ‘‘तलाक, तलाक, तलाक से तलाक हो गया; निकाह, निकाह नहीं रहा, मजाक हो गया।’’
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