Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

टीआरपी घोटाला-वीरेंद्र देवांगना

टीआरपी घोटाला::
समाचार-पत्रों के जमाने में पीत पत्रकारिता होती थी, जिसमें किसी को बदनाम करने के लिए खबरों में मिर्च-मसाला लगाकर परोसी जाती थी। इलेक्ट्रानिक मीडिया आने पर फर्जी न्यूज और फेक न्यूज परोसा जाने लगा और अब टीआरपी का खेल बढ़-चढ़़कर खेला जा रहा है।
यह सच है कि सुशांत सिंह राजपूत के मामले को कई टीवी चैनलों ने सुशांत को न्याय दिलाने के नाम पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है। इसमें बालीवुड की ड्रग्सलीला भी उजागर की गई है, जो एनसीबी की कार्रवाई पर आधारित है।
मुंबई पुलिस का दावा है कि उसने ऐसे रैकेट का पर्दाफाश किया है, जो टेलीविजन रेटिंग पाइंट (टीआरपी) बढ़ाने के लिए पैसे देकर सिस्टम से छेड़छाड़ करता है।
विदित हो कि टीवी चैनलों के लिए टीआरपी वह माध्यम है, जिससे पता चलता है कि किसी चैनल को लोग कितनी मर्तबा या कितने वक्त तक देखते हैं। इसमें कई घरों में डेटा जुटानेवाला बैरोमीटर लगा होता है, जिसमें टीवी को देखने का रिकार्ड दर्ज होता रहता है। इसी से यह भी पता चलता है कि किस टीवी कार्यक्रम को सबसे ज्यादा देखा गया? दर्शकों की पसंद क्या है? किस चैनल की लोकप्रियता कितनी है?
पुलिस का दावा है कि घपला यही है कि कई टीवी चैनल अपनी टीवी को लगातार चलाए रखने के लिए घरवालों को प्रतिमाह 400 से 500 रुपया देते हैं, जो रिश्वत की श्रेणी में आता है। टीआरपी की निगरानी के लिए एक अकेले मुंबई में ही दो हजार से अधिक बैरोमीटर स्थापित किए गए हैं।
बैरोमीटर की निगरानी के लिए बार्क ने ‘हंस’ एजेंसी को ठेका दिया है। ‘हंस’ एजेंसी ने ही टीआरपी रैकेट की शिकायत मुंबई पुलिस से की थी, जिसके आधार पर अपराध दर्ज किया गया है।
मुंबई पुलिस का यह भी कहना है कि हमे संदेह है अगर यह खेल मुंबई में चल रहा है, तो देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसा खेल निश्चित तौर पर चल रहा होगा।
पुलिस का यह भी दावा है कि जो लोग अंग्रेजी नहीं समझते, उन लोगों के घरों में भी पैसे देकर एक ही चैनल लगातार चलवाया जाता था।
कहा जाता है कि टीआरपी में हेराफेरी का खेल विज्ञापन के लिए किया जाता है। इसके जरिए विज्ञापन बाजार का बहुत बड़ा हिस्सा अपनी ओर खिंचा जाता है। टीवी चैनलों के लिए विज्ञापन का यह बाजार 30 हजार करोड़ रुपए के आसपास का है। टीआरपी के इस खेल में तीन चैनलों के नाम सामने आए हैं, जिसमें चार लोगों को हिरासत में लिया गया है।
बार्क वह एजेंसी है, जो टीवी चैनलों के लिए हर हफ्ते रेटिंग पाइंट जारी करता है। बार्क मीडिया उद्योग का ही एक निकाय है, जिसका गठन सटीक, विश्वसनीय और समय पर टीवी दर्शकों की संख्या मापने के लिए किया जाता है।
इन्हीं तथ्यों के दृष्टिगत सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने निजी टीवी चैनलों के लिए एडवाइजरी जारी कर कहा है,‘‘केबल टेलीविजन नेटवर्क (रेगुलेशन) अधिनियम, 1995 के तहत किसी भी कार्यक्रम में अर्द्धसत्य या किसी की मानहानि करनेवाली सामग्री का प्रसारण नहीं होना चाहिए। टीवी कार्यक्रमों में ऐसी कोई सामग्री नहीं होना चाहिए, जो अश्लील, मानहानिकारक, झूठे या अर्धसत्य हों। या फिर किसी व्यक्ति, समूह, समाज के तबके, जनता या देश के नैतिक जीवन की आलोचना करने, लांछन लगाने या अपमानित करनेवाली न हों।’’
मंत्रालय का यह भी कहना कि सुशांत सिंह राजपूत व तब्लीगी जमात के मामले में सुप्रीमकोर्ट ने भी टिप्पणी की है कि हाल के दिनों में बोलने की आजादी के हक का सबसे ज्यादा दुरुपयोग हुआ है।
–00–

24 views

Share on

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn
Share on email
Email
Share on print
Print
Share on skype
Skype
Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

Leave a Reply

कांग्रेस में कलह-वीरेंद्र देवांगना

कांग्रेस में कलह:: करीब एक माह पूर्व कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में 23 प्रमुख कांग्रेसी नेताओं के नेतृत्व परिवर्तन के पत्र को लेकर धमासान हो

Read More »

फर्जी आदिवासी-वीरेंद्र देवांगना

फर्जी आदिवासी:: छग के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद कुमार जोगी की मृत्यु से रिक्त मरवाही विधानसभा, (जो अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है) उपचुनाव के

Read More »

कोरोना नियंत्रण के लिए दोहरा मापदंड-वीरेंद्र देवांगना

कोरोना नियंत्रण के लिए दोहरा मापदंड:: कोरोना महामारी का फैलाव अभी थमा नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सक ठंडकाल में इसके विस्तार की चेतावनी दे चुके हैं।

Read More »

Join Us on WhatsApp