यह कैसा सितम- सीमा पोद्दार

यह कैसा सितम- सीमा पोद्दार

ओह आज शादी का दिन, और मैं पार्लर भी ना जा सकी। घर में इतना काम, यह सोच-सोचकर दुलहन की सगी मामी जी का जो 36 37 साल की थी ,उस महिला का बुरा हाल हो रहा था ।शादी से कई दिन पहले से ही चेहरे पर भारी भरकम मेकअप करवा कर चेहरे का बुरा हाल करवा रखा था। आज शादी वाला दिन था, और घर में ज्यादा काम होने की वजह पार्लर भी ना जा सकी । इस वजह सुन्दर दिखने की चाह में ,तरह तरह के हेयर स्टाइल बदलते रहे ।चेहरे पर पाउडर क्रीम का उतार चढ़ाव होता रहा ।पर उसे तो दु दुल्हन से भी सुंदर बनने की चाहत थी जो इस उम्र में मुमकिन नहीं था।और तो और उसके ब्रांडेड मेकअप भी लगभग खत्म हो चुका था क्योंकि जो भी आता मांग कर ले जाता हमारे यहां यह आदत है कि चाहे हमारे पास जितना भी हो ,एक बार दूसरों के चीजें यूज़ जरूर करनी है ।बेचारी मामी पार्लर भी ना जा सकी और मेकअप भी खतम ,तभी बड़ी चाची जी भी आ गई और बोली।अरे कोमल जरा अपना मेकअप तो देना ।बारात आने वाली है ,इन लोगों ने मेरा सारा मेकअप अपना मुंह पर पोत पोत के खत्म कर दिया हैं ।सुनके कोमल यानी मामी के हृदय पर ऐसा लगा जैसे किसी ने जोर से हथोड़ा मार दिया हो उदास चेहरे से बोली। दीदी तुम यह क्या कह रही हो आई लाइनर मस्कारा दोनों ही खत्म हो गया। पोछ -पोछ कर लगाई हूं ।ऐसी बातें करती हो तो मुझे रोना आ रहा है।जो रोने लगी तो यह भी बह जाएगा फिर मेरा क्या होगा दीदी ।फिर चाचीजी मुह बना कर बोली चलो ठीक है, टाइम पर कोई नहीं देता
मेरे पास काजल है वही लगा लेती हूं ऐसी सुंदर चेहरा हो तो ज्यादा मेकअप की जरूरत नहीं ।ऐसे मुझे देखकर कोई नहीं कहेगा कि मैं दुल्हन की बड़ी चाची हूं ।और चली गई जैसे ही दरवाजे के बाहर निकली बंद होंठो से इतना मुंह पर मेकअप कर लिया है बिल्कुल बंदरिया लग रही है और कहती है। मेकअप खत्म हे भगवान आज ही मेरा मेकअप खत्म होना था । मेकअप के बिना ना जाने मैं कैसे देखूंगी।

 

 Seema Poudhar

   सीमा पोद्दार

लुधिअना,पंजाब

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