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हँसी मज़ाक

चुटकुल

मुझे लिखने का बहुत सोख है इस लिए मै ने बगल वाले दुकान पर लिख दिए कि यहाँ पुरी समान विकि हुई है😁😁😁😁

चुटकुल

पत्नी, ए जी आप जयमाला के समय मेरी दीदी को माला क्यो पहनेय पति , बिना मेहनत किये दो बच्चों के बाप बनना था इस लिए😁

चुटकुल

पत्नी, ए जी आप जयमाला के समय मेरी दीदी को माला क्यो पहनेय पति , बिना मेहनत किये दो बच्चों के बाप बनना था इस लिए😁

शादी से पहले– और शादी के बाद / नमन कुमार कवि

———– हास्य कविता———– लड़का: शुक्र है भगवान का इस दिन का तो मे कब से इंतजार कर रहा था। लड़की : तो अब मे जाऊ? लड़का : नही बिल्कुल नही। लड़की : क्या तुम मुझसे प्यार करते हो? लड़का : हा करता था करता हूं करता रहूगा। लड़की : कभी मेरे साथ धोखा करोगे ? …

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व्यंग्य-कथाःः कुकुरप्रेमी श्रीमान-वीरेंद्र देवांगना

व्यंग्य-कथाःः कुकुरप्रेमी श्रीमानःः श्रीमानजी को कुकुर प्रेम का खानदानी बुखार था। वे शान से कहा करते थे कि उनके बाप-दादों के पास ऐसे-ऐसे विदेशी नस्ल के कुत्ते थे, जिसको देखकर पड़ोसी जल-भुनकर कोयला हो जाया करते थे और वे कुत्तों को भोंका करते थे। पड़ोसी-तो-पड़ोसी; उनके बाप-दादों के श्वानप्रेम की खातिर उनकी मां व दादी …

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पुरस्कार गपियन का-पदम् सेन

क्या करु सोच रहा था मन में तभी एक हवा का झोंका आया आंगन में ऐसी खुशबु महक रही थी जैसे खड़ा हु चमन में दाएं देखा बाए देखा फिर देखा उपर गगन में दौड़ के गया बाहर गलियन में आप भी आ गए मेरी बतियन में मुझको तो पुरस्कार मिला हुआ है गपियन में

पुरस्कार गपियन का-पदम सेन

क्या करु सोच रहा था मन में तभी एक हवा का झोंका आया आंगन में ऐसी खुशबु महक रही थी जैसे खड़ा हु चमन में दाएं देखा बाए देखा फिर देखा उपर गगन में दौड़ के गया बाहर गलियन में आप भी आ गए मेरी बतियन में मुझको तो पुरस्कार मिला हुआ है गपियन में

व्यंग्य-लेखःः इंटरनेट पर साहित्य-सम्मेलन-वीरेंद्र देवांगना

व्यंग्य-लेखःः इंटरनेट पर साहित्य-सम्मेलनःः साथियो, आपको यह जानकर खुशी होगी कि मैंने एक इंटरनेट गु्रप का गठन कर रखा है, जिसमें वे सभी कवि सम्मिलित हो सकते हैं, जो कविता करना जानते हैं। गु्रप का नाम है-‘इंटरनेट पर साहित्य।’ मित्रो, आजकल साहित्यकारों की हालत पतली हो गई है। वे लिख-लिखकर परेशान हैं, लेकिन उनकी किताबों …

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सुबह न उत पाने का दर्द-नीतू सिंह

जनाब पिछले कई वर्षों से झेल रहे, सुबह ना उठ पाने का दर्द । सुबह देर से उठने के बाद, अगले दिन का पूर्ण उत्साह चरम पर । जोश जुनून से फिर वादा खुद से पक्का, कल से जल्दी उठेंगे ,करेंगे ऐसा नया काम। कि जमाने में होगा बड़ा ही नाम । खयालों का पुलाव …

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व्यंग्य-लेखःः नववर्ष का स्वागत – वीरेंद्र देवांगना

व्यंग्य-लेखःः नववर्ष का स्वागतःः हे नववर्ष, आगत का है स्वागत और दुआ-सलामत कि रखो हमारा ध्यान; कोरोना की वजह से फिर न जाए किसी की जान। रखो सबका मान; यही विनती है। हे कृपानिदान! करते हैं अर्ज; तुम्हारा भी बनता है फर्ज। सुनो, हमारी फरियाद; अब न भेजो कोरोना की कोई नाजायज औलाद। अब न …

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व्यंग्य-कथाःः टांग खिंचाई वायरस-वीरेंद्र देवांगना

व्यंग्य-कथाःः टांग खिंचाई वायरस यह बात सोलह आना सही है कि इंसान कोरोनावायरस से मुक्त हो सकता है, लेकिन टांग खिंचाई वायरस से नहीं। यह वायरस एक बार शरीर में प्रवेश कर लेता है, तो उससे मुक्त होना वैसा ही नामुमकिन है, जैसे पाकिस्तानी सरकार को डान को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है, जैसे …

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व्यंग्य-कथाःः एक रेपिस्ट से मुलाकातःः-वीरेंद्र देवांगना

व्यंग्य-कथाःः एक रेपिस्ट से मुलाकातःः पहले जैसे चोर-उचक्के, बटमार-पाकिटमार, जमींदार-साहूकार, डाकू-लड़ाकू गली-मोहल्ले में मिल जाया करते थे, वैसे ही आजकल रेपिस्ट और टेरेरिस्ट मिलने लगे हैं। एक दिन एक रेपिस्ट से चलते-फिरते मुलाकात हो गई, तो मैंने उसे डपटते हुए पूछा,‘‘कैसे करते हो ये सब। तुम्हें शर्म नहीं आती।’’ उसने बेखौफ जवाब दिया,‘‘बहुत आसान है। …

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