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कविताएँ

जीने की राह-यज्ञस्य साहु

जीवन जिन्दादिली का नाम है, इस जीवन मे करना अच्छा काम है।। अगर जीवन मे बुलन्द हौसले हो, उसे ही मिलता मुकाम है। जीवन जिन्दादिली का नाम है, इस जीवन में करना अच्छा काम है।। जो दुख मे संयम रखे वही सही इन्सान है। सही काम कर के जो मिलती खुशी , वही पे भगवान …

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ओ मेरी साँसों के दीप-अशोक दीप

ओ मेरी साँसों के दीप ! विश्व सदन की जोती बनकर जले सदा तू तारों बीच । है बस जीवन साध यही अब ओ मेरी साँसों के दीप ! चंद्र-कलश हाथों में लेकर सुधा- चूर्ण बरसाओ नभ से तरल तुहिन शीतलता धरकर दग्ध विषाद मिटाओ जग के दीपित होकर भव- कोशो में आलोक पुँज रजत …

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“मेरी प्यारी दादी”-जनक नंदनी

बचपन की वो बातें थी l बचपन की वो राते थी ll दादी तारों को देखकर l रोज नयी कहानी सुनाती थी ll चन्दा मामा आरे आजा पारे आजा l नदियाँ किनारे आजा ll ऐसे लोरी कुछ गाती थी l नये निती की शिक्षा देकर ll कुछ नया बताती थी l बचपन की वो बातें …

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जिस रास्ते पर चलती हो – युगानुयुग कविता संग्रह-अशोक कुमार यादव

जिस रास्ते पर चलती हो,निशान बन जाता है। मैं जिधर-जिधर देखूं,उधर तू ही नजर आता है।। फैल गया है सुरभि चहूंओर,तुम्हारे तन से निकल रहा है। हो रहा हूं मैं मुग्ध सूंघकर,प्रस्त्रवण सदृश तीव्र झड़ रहा है।। लेकर तुम कुसुम से मकरंद,कराती हो मुझे प्रेम रसपान। अपलक देख रही हो मेरे ओर,मृदुलता धारण की हो …

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गीत (आओ सब मिल कर संकल्प करें)-बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’

गीत (आओ सब मिल कर संकल्प करें) आओ सब मिल कर संकल्प करें। चैत्र शुक्ल नवमी है कुछ तो, नूतन आज करें। आओ सब मिल कर संकल्प करें॥ मर्यादा में रहना सीखें, सागर से बन कर हम सब। सिखलाएँ इस में रहना हम, तोड़े कोई इसको जब। मर्यादा के स्वामी की यह, धारण सीख करें। …

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गीत (माता के दरबार चलो)-उल्लाला छंद “किसान”

गीत (माता के दरबार चलो) माता के दरबार चलो। माता बेड़ा पार करेगी, करके ये स्वीकार चलो।। जग के बन्धन यहीं रहेंगे, प्राणी क्यों भरमाया है। मात-चरण की शरण धार के, मन से त्यज संसार चलो।। माता के दरबार चलो।। जितना रस लो उतना घेरे, जग की तृष्णा ऐसी है। रिश्ते-नाते लोभ मोह का, छोड़ …

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Dil Ki Baatein-shubham dixit

वक़्त ने वक़्त पर कभी भी कुछ न दिया, जब भी कभी कुछ बनाया हमने तो कभी उस वक़्त पर वो शख्स मौजूद न रहा! वाह रे वाह जिंदगी कभी हमने कुछ तुझसे माँगा नही जब किसी के लिए कुछ माँग तो तुने देने से पहले उस शक्स को हमसे छीन लिया।

Dil Ki Kuch Baatein=shubham dixit

यु तो हमे रूठना,रोना,जलना, हार मानना कभी आता न था, इस ज़िन्दगी के कशमकश मैं हमारे अपनों ने हमारे लिए अपने अंदर यह गुण ला दिया!

Dil Ki Baatein-shubham dixit

जिंदगी कभी किसी के आने या जाने से किसी कोई फ़र्क नहीं पड़ता, लेकिन फ़र्क पड़ता है तो उसने तुमसे लिया क्या और बदले में दिया क्या?

Dil Ki Kuch Baatein-shubham dixit

लोगो का क्या है कहते हमे किसी क्या लेना देना, जब बात किसी को बुरे कहने की आये तो सब मान लेते है, और जब किसे को अच्छा मनाने की बात आये तो मना कर देते है

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