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गीत

ओ मेरी साँसों के दीप-अशोक दीप

ओ मेरी साँसों के दीप ! विश्व सदन की जोती बनकर जले सदा तू तारों बीच । है बस जीवन साध यही अब ओ मेरी साँसों के दीप ! चंद्र-कलश हाथों में लेकर सुधा- चूर्ण बरसाओ नभ से तरल तुहिन शीतलता धरकर दग्ध विषाद मिटाओ जग के दीपित होकर भव- कोशो में आलोक पुँज रजत …

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गीत (आओ सब मिल कर संकल्प करें)-बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’

गीत (आओ सब मिल कर संकल्प करें) आओ सब मिल कर संकल्प करें। चैत्र शुक्ल नवमी है कुछ तो, नूतन आज करें। आओ सब मिल कर संकल्प करें॥ मर्यादा में रहना सीखें, सागर से बन कर हम सब। सिखलाएँ इस में रहना हम, तोड़े कोई इसको जब। मर्यादा के स्वामी की यह, धारण सीख करें। …

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गीत (माता के दरबार चलो)-उल्लाला छंद “किसान”

गीत (माता के दरबार चलो) माता के दरबार चलो। माता बेड़ा पार करेगी, करके ये स्वीकार चलो।। जग के बन्धन यहीं रहेंगे, प्राणी क्यों भरमाया है। मात-चरण की शरण धार के, मन से त्यज संसार चलो।। माता के दरबार चलो।। जितना रस लो उतना घेरे, जग की तृष्णा ऐसी है। रिश्ते-नाते लोभ मोह का, छोड़ …

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तुम जितने उर में उतारोगे-आशीष कुमार यादव

तुम जितने उर में उतारोगे उतनी नयन कथाये उलझी होगी यह प्रेम प्रकोप की छाया है जो हर मानस में उतरी होगी मैं किसकी पीर सुनाऊं या किसकी पीर छुपाऊं कुछ पर बीत चुकी होगी और कुछ पर बीत रही होगी…. दूर बसी दो सांसें जो तडपन दर्पण में करती हैं लिये आस का भाव …

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मेरी सासे थम जाए अगर-डिंपल-कुमारी

मेरी सासे थम जाए अगर तो मत आना पास मेरे तेरे आने से अगर जीने की चाह बढ़ जाए मेरे तो मत आना पास मेरे मै एक फ़ौजी इस देश का बेटा है अभी अधूरे फर्ज अभी मेरे तुम मत करना मुझसे प्यार मै लाल हु भारत मा का मुझे है प्यारा मेरा देश देना …

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सब कुछ बेच दिया मेरे मुल्क का-अजयकुमार

ना दिन को सुकून है साकिर ना रात को सुकून है, यह कैसा तुम पे उमड सियासी का जुनून है | जो बनाये हैं तुमने किसान बिल को, ये किसान बिल नहीं किसानों के अधिकारों का खून है| अच्छा विकास किया तूने मेरे मुल्क का सब कुछ बेच दिया मेरे मुल्क का – 3 मेरे …

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गीत (आज बसंत की छाई लाली)-बसुदीओ अग्रवाल नमन

गीत (आज बसंत की छाई लाली) आज बसंत की छायी लाली, बागों में छायी खुशियाली, आज बसंत की छायी लाली॥ वृक्ष वृक्ष में आज एक नूतन है आभा आयी। बीत गयी पतझड़ की उनकी वह दुखभरी रुलायी। आज खुशी में झूम झूम मुसकाती डाली डाली। आज बसंत की छायी लाली॥1॥ इस बसंतने किये प्रदान हैं …

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तिरंगा मेरी जान-अजय कुमार

मेरी आन बान शान, तिरंगा मेरी जान-2 सबसे ज्यादा इसके मान,  सबसे अलग इसकी पहचान |  इस पे ऋतुए भी मेहरबान, मेरा भारत महान | मेरी आन बान शान  तिरंगा मेरी जान -2 सेना हो जाती कुर्बान,  कई हो गए बलिदान | इसलिए इसमें मुझे अभिमान, मेरा भारत महान |  मेरी आन बान शान  तिरंगा …

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इस जगत के हर एक प्राणी में राम हैं-बालकवि-जय -जीतेन्द्र

राम के राम हैं, राम में राम हैं। इस जगत के हर एक, प्राणी में राम हैं।। जाना हमको वहीं, जाना तुमको वहीं। पर जाना हमने नहीं, जाना तुमने नहीं।। जो हैं घट-घट में व्याप्त, वो ही राम हैं। इस जगत के हर एक, प्राणी में राम हैं।। सबको संकट से उबारे, भवसागर से तारे। …

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इस जगत के हर एक प्राणी में राम हैं-बालकवि-जय-जितेंद्र

राम के राम हैं, राम में राम हैं। इस जगत के हर एक, प्राणी में राम हैं।। जाना हमको वहीं, जाना तुमको वहीं। पर जाना हमने नहीं, जाना तुमने नहीं।। जो हैं घट-घट में व्याप्त, वो ही राम हैं। इस जगत के हर एक, प्राणी में राम हैं।। सबको संकट से उबारे, भवसागर से तारे। …

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कवि बनने के लिए करना पड़ता है-अभिषेक-श्रीवास्तव-अभि-शिवाजी

अपने गमों को सीने में दफना कर, मुस्कुराना पड़ता है, कवि को बहुत कुछ झेलना पड़ता है, ना हो हमारी मौजूदगी से लोग उदास, इस बात का ख्याल कर उनके फीलिंग से खेलना पड़ता है, कवि को बहुत कुछ झेलना पड़ता है… कुछ लोग से हो जाती है कहासुनी अक्सर कवि की, फिर भी बहुत …

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प्रीतम छोड़ि चला यह देश-कवी प्रकाश प्रीतम

जीवन दूभर होइगा अब तो मन मे बहुतै ठेश। प्रीतम छोड़ि चला यह देश। यहाँ बसे हैं धन के लोभी, यहाँ बहुत हत्यारे। यहाँ मोल में रिश्ता विकता खुलकर बीच बजारे। जातिवाद है चरम पे अपने धर्मवाद का द्वेष। प्रीतम छोड़ि चला यह देश। हंस यहाँ दाना न पावै बगुला चुगता मोती। राजा यहाँ मलाई …

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