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शायरी

Dil Ki Baatein-shubham dixit

वक़्त ने वक़्त पर कभी भी कुछ न दिया, जब भी कभी कुछ बनाया हमने तो कभी उस वक़्त पर वो शख्स मौजूद न रहा! वाह रे वाह जिंदगी कभी हमने कुछ तुझसे माँगा नही जब किसी के लिए कुछ माँग तो तुने देने से पहले उस शक्स को हमसे छीन लिया।

Dil Ki Kuch Baatein=shubham dixit

यु तो हमे रूठना,रोना,जलना, हार मानना कभी आता न था, इस ज़िन्दगी के कशमकश मैं हमारे अपनों ने हमारे लिए अपने अंदर यह गुण ला दिया!

Dil Ki Baatein-shubham dixit

जिंदगी कभी किसी के आने या जाने से किसी कोई फ़र्क नहीं पड़ता, लेकिन फ़र्क पड़ता है तो उसने तुमसे लिया क्या और बदले में दिया क्या?

Dil Ki Kuch Baatein-shubham dixit

लोगो का क्या है कहते हमे किसी क्या लेना देना, जब बात किसी को बुरे कहने की आये तो सब मान लेते है, और जब किसे को अच्छा मनाने की बात आये तो मना कर देते है

Dil Ki Kuch Baate-shubham dixit

दिल और दिमाग मे बस फ़र्क इतना है, जो दिल मे एक बार आजाए वो कभी दूर नही जा सकता और जो दिमाग मे आजाए वो कितना ही दूर क्यों न हो पास आही जाता है।

बीना कुछ कहे ही-मुकीम खान

बीना कुछ कहे ही बहुत कुछ कहे दती ये आखें हा जुबान पे लिखें शब्दों को पढ लती हे आखें बीना कुछ कहे ही दील की बातें समझ लेते हैं कुछ लोग और बहुत कुछ कहे करें भी कुछ लोग समझ नहीं पाते ये दील की बातें

महक अंसारी

खुशियो को जैसे नज़र लग गई है भोर हुई भी नही कि दोपहर लग गई है खुशियो ने दस्तक दी जो दर पर हमारे जाने कैसे ग़मो को ख़बर लग गई है ।।

“बड़ी नादान हो”-आशा ऐ अस

क्यो इतना ज्यादा बोलती हो तुम,, क्यो गैरों के सामने अपने राज खोलती हो,, यहां कोई इतना पाक नहीं जो अल्फाज़ो की कद्र करे,, फिर क्यो अपने जज्बात गैरों से बोलती हो तुम,, किसकी तलाश में दर-बदर घूमती हो ? कौन है वो जिसे हर चोखट पर ढूँढती हो,, खुद में ही पूरा घर रोशन …

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दिल की हालत-अमन चीमा

आज मैंने अपने दिल की दुकान क्या खोली, मुझे हर तरफ यादों का मलबा बिखरा मिला। दिल की हालत बिगड़ने लगी, दिल में इश्क़ की सब नदियां सूख गई थी। अगर तुम ने मेरे दिल की ये हालत देख ली, तो तेरी आंखों से आंसुओं की बरसात होने लगेगी।

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