Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें
Certificate is not issued to the author at present. Minimum 10 articles should be published on Sahity Live website to get the certificate.

बी. ए. और वो

shivam 03 Aug 2025 कहानियाँ प्यार-महोब्बत Love story, प्यार भरी कहानी लव स्टोरी, कहानियां 21859 0 Hindi :: हिंदी

सोनू के पापा की गोलगप्पे की एक छोटी सी दुकान है उसी से घर का सारा खर्च चलता है सोनू का एक छोटा भाई और एक बहन है सोनू अपनी जिंदगी में कुछ अच्छा बनना चाहता है कुछ बड़ा काबिल बनना चाहता है इसी उम्मीद से वह शहर के ही एक कॉलेज से बा कर रहा है उसने कुछ दिन पहले यूपीएससी की कोचिंग भी की थी लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण कोचिंग छोड़नी पड़ी अब वह घर पर ही अपनी मेहनत से तैयारी कर रहा है। शाम को पापा के काम में हाथ भी बताता है क्योंकि शाम को गोलगप्पे के ठेले पर भीड़ भाड़ को ज्यादा ही हो जाती है सोनू गोलगप्पे का काम निपटा के ही पापा के साथ थैला लेकर घर लौटता है घर पहुंचने के बाद पूरा परिवार साथ बैठकर भोजन करता है वैसे खाना खाने के बाद नींद आने लगती है अगर कभी सोनू को रात में नींद नहीं आती तो पढ़ाई भी कर लेता है सुबह फिर वही दिनचर्या सुबह 5:00 बजे उठकर घरों में न्यूजपेपर डालना पड़ता है, वहां से लौट कर चाय नाश्ता करता और कॉलेज जाने की तैयारी होती तैयार होकर सोनू कॉलेज पहुंचते हैं कॉलेज में क्लास नियमित लेता है और जो विषय उसके पास नहीं उसकी क्लास भी चुपके से ले लेता है एक दिन उसके मित्र , मित्र मंडली लगाकर उसके दोस्त कहने लगे इसे तो प्यार होगा ही नहीं कि पिए तो लड़कियों से बात करने से भी डरता है इसे प्यार का क्या होगा, यह क्या जाने प्यार क्या होता है ऐसी बातें करते थे उसके क्लासमेट उसके लिए। अगर सोनू का क्लास में मन नहीं होता तो वह लाइब्रेरी बजाकर पढ़ लेता इसके बाद घर लौटा और शाम को फिर पापा के काम महान बटा सही उसकी दिनचर्या एक दिल सोनू एक दावत पलक पार्टी से लौट रहा था सोनू अकेला ही था लगभग रात के 10:00 बज रहे थे सोनू डे देखा कि एक लड़की सैंपल कपड़े पहने हुए रहने वाली गांव की लग रही है लेकिन शर्म शब्द और वह खूबसूरती है मानो उसे देख कर ऐसा लगा कि आज धरती पर शांत रहो सारे गुन गुन रहे हो और बादलों की कल रात कुछ कहना चाहती हो अचानक कुछ लड़के आते हैं और लड़की को परेशान करते हैं उस पर कमेंट पास करते हैं लड़की हम जाती है सोनू वैसे तो सिद्ध सादा लड़का है लेकिन लड़कों की यह बदतमीजी सोनू को पसंद नहीं आती है पर वह लड़कों से भीड़ जाता है दिल के चार पास थे फिर भी सोनू धरा नहीं उसे यह सब अरदास ना हुआ रुल लड़कों का सामना करने लगता है आंखें लड़के यह सब देख कर भाग जाते हैं और आसपास के लोग दिया जाते हैं एक लड़के रे सोनू केसर पर ओल्ड मार दी होती है सोनू के काफी खून बहा होता है लड़की कहती है चलो ठीक पर पट्टी करा लो सोनू लिखा तुम घर जाओ मैं कर लूंगा सोनू क्लिक पर जाकर पट्टी कराता है और उसके बाद घर जाता है घरवाले सोनू की पट्टी देखते ही घबरा जाते हैं सब पूछे लगते हैं क्या हुआ कैसे लग गई किससे लड़ाई गुस्सा लो कविता रास्ते पर गड्ढा था मैंने गड्ढा देख नहीं पाया पर बेरा उसमें पैर फिसल गया चोट लग गई।

 सोनू की मां :  कहती है देकर ही चल सकता था कहीं कोई पीछे गाड़ी आ रही होती तो क्या होता
 
सोनू कहता है: -  छोटी मोटी छोटे तो लकी रहती हैं आप तो मम्मी खामखा परेशान होती हो।

 सोनू की मां :-  कहती है चल अब खाना खा ले पूरे दिन ठीक से खाना भी नहीं खाता ऊपर से सिर और फोड़ लाया है। 

सोनू :- मां खाना लाओ मैं ठीक हूं पूरे दिल का खाना भी खा लूंगा ठीक, अब तो खुश हो।

सोनू ने चार जगह की 6 7 रोटी खा ले और सो गया। 
अगली सुबह फिर वही दिनचर्या 5:00 बजे उठकर पेपर डालने जाना वहां से लौट कर चाय नाश्ता और फिर कॉलेज की तैयारी तैयार होकर सोनू कॉलेज पहुंच क्लास खत्म होने के बाद वह कॉलेज की लाइब्रेरी पहुंचा वहीं उसकी मुलाकात इस लड़की से हुई कॉलेज की यूनिफॉर्म में वह और भी खूबसूरत लग रही थी उसकी आंखें एकदम हिरण की जैसी चेहरे पर मासूमियत और होठों पर शर्मीलापन 
लड़की ने सोनू से कहा :- सोनू को थैंक्स बोला 
सोनू :- थैंक्स की क्या जरूरत दोस्ती में थैंक्स नहीं होता। 
लड़की :- कल अगर आप ना होते तो पता नहीं क्या होता। 
सोनू :- सोनू ने कहा मेरे रहते आपको डरने की जरूरत नहीं है।
लड़की :- हम दोस्त बन गए मगर मैं तो आपका नाम पूछना भी भूल गई उसे लड़की ने पूछा आपका नाम क्या है। 
सोनू :- जी मेरा नाम सोनू है और आपका। 
लड़की :- जी मेरा नाम शालिनी है, मैं बीए फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट हूं और आप??
सोनू :- जी मैं भी बी. ए. सेकंड ईयर का स्टूडेंट हूं।
शालिनी :- मेरे पास समाजशास्त्र राजनीत शास्त्र और इतिहास है। 
सोनू  :- आगे फ्यूचर में क्या करने का इरादा है। 
शालिनी : - अभी तो मैं बा कर रही हूं लेकिन मुझे क्रिकेट बहुत पसंद है मैं अच्छा खेल भी लेती हूं। 
सोनू :- मुझे लगता है आप बहुत अलग किस्म की हैं आप जैसी लड़कियां आज है जो ऐसी इच्छा रखती है क्रिकेट की अगर आप क्रिकेट पसंद है और आप अच्छा खेल भी लेती है तो आप क्रिकेटर क्षेत्र में जाएं ज्यादा अच्छा रहेगा। 
शालिनी :- काश ऐसा होता लेकिन मेरे घर वाले कहां मानते हैं वह तो कहते हैं लड़कियां यह सब नहीं करती लड़की को तो आखरी में रोटी पानी ही करना है समझ में लोग क्या कहेंगे ऐसा कहते हैं घर वाले, वह तो चाहते हैं कि मेरी बीए कंप्लीट हो जाए फिर अच्छा सा लड़का देखकर तुम्हारी शादी कर देंगे। 
सोनू :- मुझे लगता है कि आपके घर वाले पुरानी विचारधारा के 
शालिनी :- हां यार मेरे घर वाले बहुत सख्त और पुराने ख्यालों के है।
सोनू :- मुझे लगता है तो फिर सोच समझ कर फैसला लेना चाहिए अगर मेरी हेल्प की जरूरत हो तो मुझे याद कीजिएगा जहां तक संभव होगा मैं आपकी मदद करूंगा। 

इस बातों के साथ दोनों में गहरी दोस्ती हो जाती है मानो एक दूसरे को आईना मिल गया हो जिसमें वह अपने आप को देख सके अपने को देख सके ऐसी दोस्ती उनदोनों की। धीमे-धीमे यह दोस्ती प्यार में बदल गई अब उन दोनों को अलग करना बेहद मुश्किल था ऐसा लग रहा था कि एक कितना दूसरे का मैथ ही ना हो जिस तरह से पेन का महत्व कॉपी बिना नहीं इस तरह कॉपी में पेन देना नहीं ऐसा प्यार था साली ने क्रिकेटर बनने का फैसला कर लिया था वह कॉलेज के बाद क्रिकेटर सीखने जाया करती थी लेकिन यह बात उसके घर वालों को मालूम न थी शालिनी जानती थी कि अगर उसके घर वालों को यह पता चला कि है चोरी चुपके क्रिकेट सिखाती है तो उसकी पढ़ाई बंद कर दी जाएगी और उसकी शादी कर दी जाएगी। लेकिन शालिनी ऐसा नहीं चाहती थी पर क्रिकेट बनना चाहती थी क्रिकेट सीखने का पैसा शिवानी अपनी पॉकेट मनी से और कुछ सोनू अपनी जेब से देता था। शालिनी क्रिकेट खेलने में माहिती उसके कुछ भी उसकी तारीफ किया करते थे लेकिन एक दिन उसके घर वालों को यह बात आखिर पता चल ही गई क्रिकेटर की बात तो पता चली ही उसके साथ यह भी पता चल गया कि क्रिकेट सीखने का पैसा एक लड़का देता है साली के लिए अब क्या होना था पढ़ाई छूट की तैयारी अब तो है बाहर आने जाने पर भी रोक लग गई शालिनी इस बात से बहुत दुखी थी कि अगर उसकी शादी हुई तो उसका क्रिकेटर का सपना टूट जाएगा और सोनू से प्यार भी करती है उससे भी अलग नहीं हो सकती कुछ दिन बाद शालिनी को पता चला कि उसके लिए लड़का देख लिया गया है जो 12वीं पड़ा है पास के ही एक गांव का है सूरत में किसी फैक्ट्री में काम करता है साल नहीं है जानती थी कि गांव की क्या मानताएं होती हैं वह कैसा सोचते हैं उसकी अगर शादी हुई तो उसका क्रिकेट का सपना बेहद मुश्किल है एक दिन सोनू और शालिनी की मुलाकात फिर कॉलेज में हुई। 

शालिनी :- मेरा तो घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है घर वाले कॉलेज भी नहीं आने देते हो तो मैं आज चोरी छुपे कॉलेज आई हूं मोहल्ले वाले कहते हैं देखो उनकी बिटिया को सख्त ले कितनी भोली लगती है और कैसे भरे पड़े वह मन ही मन सोचती है ऐसा क्या मैं कर दिया जो मुझ पर इतनी पाबंदी लगा दी गई। 
यह सारी बातें बताते हुए शालिनी की आंखें भर आई। 

सोनू कहता है :- तुम्हारा क्या विचार है लाइफ के बारे में तुम्हारी खुशी में ही मेरी खुशी है। 
शालिनी :- उसने बहुत ही दबी आवाज में कहा सोनू मैं सिर्फ तुमसे प्यार करती हूं तुम्हारे सिवा मैं किसी और के साथ जी नहीं सकता पाऊंगी उसके दिल के भाव उसकी आंखों में बार-बार छलक आते हैं।

सोनू ने भी तभी आवाज में कहा :- ठीक है तुमने अगर फैसला कर लिया है तो मैं तुम्हारे साथ हूं और यह साथ तभी छूटेगा जब हम में से कोई एक इस दुनिया से चला जाएगा।
   अब क्या होना था? उधर उसके घर शादी की तैयारी चल रही थी इधर दोनों साथ रहने का मन बना चुके थे बस रात को एक दिन घर से भागने का प्लान बना शालिनी रात को ही अपने सारे कागजात अपने गहने पापा की तिजोरी में रखें कुछ पैसे लेकर फरार सलीम घर से चुपके से साइकिल लेकर 10 किलोमीटर दूर शहर के स्टेशन पहुंच गई सोनू भी वहां पहले ही पहुंच चुका था अब क्या ट्रेन आने का इंतजार ट्रेन आई और दोनों दिल्ली रवाना। पता नहीं कहां रहेंगे कैसे रहेंगे बस दोनों चल दिए दिल्ली 
उधर सुबह हुई पता चला कि साली कहां गई घर ढूंढ लिया कहीं नहीं खेत पर भी थोड़ा पास पड़ोस पर भी पूछा कुछ देर बाद एक पत्र हाथ लगा ।

जिसमें लिखा था " आपको मेरी चिंता करने की जरूरत नहीं मैं जिसके साथ हूं वह मुझे आप जैसा प्यार देगा मैं खुश हूं मेरी चिंता मत करना। "।             शालिनी।

    हम दोनों ने कई रहते गुरुद्वारे में गुजरी गुरुद्वारा के पुजारी बहुत अच्छे थे और नेक इंसान थे उन्होंने हमारी मां की बातों को समझा उनकी पत्नी का स्वभाव भी बहुत नाम और प्रेमपुर था वहां जितने दिन रहे कभी पराया महसूस नहीं हुआ हम दोनों उनको आई और बापू का कर बुलाते थे कुछ दिनों में हमें कॉलेज में एडमिशन मिल गया हम दोनों का कॉलेज कॉलेज एक ही था लेकिन हॉस्टल अलग-अलग थे लड़कियों का तो हॉस्टल कॉलेज में ही था लेकिन लड़कों का कुछ दूरी पर था कॉलेज के बाहर हम गुरुद्वारे से हॉस्टल में रहने वालों बापू और आई कि अक्सर की याद आती थी कभी-कभी हम दोनों उनसे मिलने भी जाया करते थे तो आई और बापू बहुत खुश होते थे आयल बापू ने भी लव मैरिज की थी हम लोग जब वहां से आते थे तो आई थी कुछ ना कुछ देती थी। 
दिल्ली आने के बाद जिस कर की सबसे ज्यादा आवश्यकता थी वह था कॉलेज में एडमिशन और रहने की जो पूरी हो गई थी अब बस अपनी सफलता की ओर बढ़ना था लेकिन एक समस्या पैसों की भी थी हम दोनों के पैसे खत्म होते जा रहे थे वही मेरी पढ़ाई लिखाई और शालिनी की पढ़ाई लिखाईऔर उसकी खोज की फीस भरनी थी अब क्या किया जाए पैसा कहां से आए तो मैं पढ़ना शुरू किया हॉस्टल से लगभग 4 किलोमीटर दूर एक बस्ती थी जहां एक हाई स्कूल सरकारी स्कूल था मैं उसे सरकारी स्कूल के बच्चों को कोचिंग देने लगा उसे समय एक बच्चे का फीस लगभग ढाई सौ रुपए मिलता था मैंने उन्हें पटाया क्योंकि उसे स्कूल के जाकर बच्चे करी भी थे बस्ती में जाकर पड़ता और रात को पड़ता यही दिनचर्या थी मैंने उन बच्चों को डेढ़ साल तक पढ़ाया उसी के पैसे से शालिनी के कॉलेज की फीस भी भरता। 
शुरू में तो 8 बच्चों को पढ़ाता था जिसमें 5 दसवीं के थे और तीन नौवीं क्लास के पढ़ते थे धीमे-धीमे बच्चे भी बढ़ गए मेरे लास्ट टाइम तक 20 बच्चे हो गए थे मैंने उसे सरकारी स्कूल के बच्चों को लगभग डेढ़ साल तक पढ़ाया होगा इस पेज से मैंने अपनी फीस और उसकी पढ़ाई लिखाई का खर्च उठाया उसकी खोज की फीस के बाद मैंने एक प्राइवेट कॉलेज में पढ़ना शुरू कर दिया जो दसवीं तक था उसका नाम था टेरेसा पब्लिक स्कूल। जब मैं प्राइवेट कॉलेज में पढ़ने लगा तो हम दोनों ने शादी कर ली और हम किराए पर लेकर रहने लगे शालिनी की क्रिकेटर की तैयारी भी चल रही थी सनी अपने कोच की सबसे लाडली विद्यार्थी थी अब सीधी शादी लड़की भी नहीं रही अब वह थोड़ा सा बदल गई थी जिस टीम में होती उसे टीम का कितना निश्चित हो जाया करता था लेकिन इस शानदार पारी के पीछे उसकी कड़ी मेहनत थी वह अपने खेल के कार्य में बिल्कुल लापरवाही नहीं करती थी अगर उसकी पढ़ाई की बात करें तो लगभग ठीक थी वह जहां भी खेलने जाती विरोधी के छक्के छोड़ जाते हैंअपना क्रिकेटर काम पूरा करने के बाद खुद कोष का काम भी करने लगी थी हाई स्कूल इंटर में पढ़ने वाली लड़कियों को क्रिकेट सिखा दी उससे थोड़ा बहुत पैसा भी मिल जाता इससे छोटा-मोटा खर्चा उठा लिया जाता और लड़कियां क्रिकेट भी सीख दी कितने मां से सिखाती थी उसके मन से सिखाती भी थी। मदर टेरेसा पब्लिक स्कूल मुझे पढ़ते पढ़ते 2 साल हो गए थे तीसरी वर्ष चल रही थी उसी समय मेरा यूपीएससी का रिजल्ट आया और मैं मांस और उसके बाद इंटरव्यू में क्वालीफाई हो गया यह खबर सब मेरे कॉलेज वालों को पता चली जी कॉलेज में पढ़ता था तो उन्होंने मुझे फोन आया कॉलेज से तुरंत और मुझे बुलाया मैं अगले दिन कॉलेज पहुंच कॉलेज मुझे सम्मानित किया गया सम्मान पाते समय मुझे अपने घर की याद आई में उदास हो गया जब मैं स्टेज से नीचे आया तो शालिनी मेरा उदास चेहरा देखकर वाली क्या हुआ घर की याद आ रही है उसे समय मेरी आंखें भर आई मैं सोच रहा था अगर वह यहां होते तो कितना खुश होते हैं। आप मेरी घर जाने की इच्छा थी मम्मी पापा और अपने घर देखने का मन था मैंने अपने घर फोन लगाया की मम्मी की आवाज सुनने का बहुत मन कर रहा था लेकिन बार-बार स्विच ऑफ बता रहा था मैं शाम को लगाया तब भी स्विच ऑफ बता रहा था शायद नंबर चेंज हो गया होगा मुझे अपने एक दोस्त का नंबर याद था जो पढ़ने में बहुत होशियार था मैंने सोचा नंबर ट्राई करते हैं शायद लग जाए मैं नंबर लगाया शुक्रिया नंबर लग गया उसे फोन उठाया बोला हेलो कौन सोनू मैंने उसे बताया तेरे पड़ोस वाला तब जाके पहचाना हरामी ने,
वो बोला, कहा है और क्या कर रहा है, मैने उसे बताया मेरी शादी हो गई है वो बहुत खुश हुआ। मैंने उसे ढेर सारी बातें की मैंने उसे पूरी बात बताई लेकिन मेरे घर पर बात न हो सकी वो घर से बाहर अपनी बहन के घर गया था।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

बहुत समय पहले की बात है रहमान चाचा के यहाँ एक चूहा रहता था. हर दिन की तरह उस दिन भी बाज़ार से गाँव लौटते वक़्त चाचा झोले में कुछ सामान लेकर � read more >>
सच्चे भाई सुबह की योगा क्लास लेने के बाद मैं पार्क से होते हुए बाजार वाली रोड पर सैर के लिए निकल पड़ी । सुबह के व� read more >>
लड़का: शुक्र है भगवान का इस दिन का तो मे कब से इंतजार कर रहा था। लड़की : तो अब मे जाऊ? लड़का : नही बिल्कुल नही। लड़की : क्या तुम मुझस read more >>
Join Us: