कहानी-कलंकी

कहानी-कलंकी

   सुबह का समय था. सूरज निकला. उसकी स्वर्ण पीताभ किरणें मेरे मुंह पर आ रहीं थी. मैं बड़े आनंद से उनका अनुभव करते हुए नींद की गोद में सिमटने की कोशिश कर रहा था कि तभी मेरी पूज्य माताजी ने मुझे जगाया. बोलीं, “कब तक सोता रहेगा. चल उठ मुंह धो ले और गाँव के
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घर पधारी सुनहरी परी – सचिन अ. पाण्डेय

घर पधारी सुनहरी परी बरखा-सी इठलाती, लोगों को हर्षाती; सौम्यता भरी कलियों-सी, घर पधारी सुनहरी परी| माँ-बाप की यों दुलारी, जीवन से ज्यादा प्यारी; अंतर में सभी के बसती, खुशियों का गीत रचती; घर पधारी सुनहरी परी| पढ़-लिखकर हुई सुशोभित, ज्ञानसन्दूक किए अर्जित; शिक्षा का पाठ पढ़ाती, घर पधारी सुनहरी परी| संघर्ष-भरे क्षण को भी,
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सूखा गुलाब (एक प्रेम कहानी) लेखक: राहुल रेड

एक प्रेम कहानी: प्रेम कहानी: उसे याद है वो सूखा हुआ गुलाब, याद है निशा के मेहँदी वाले हाँथ, याद है वो ठहरा हुआ वक्त और आँखों ही आँखों में बातें, याद है निशा के आँसू कैसे गालों का सफर करते हुए ठोड़ी पर आकर रुक जाते थे और बारिश की बूंदों की तरह टप
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मुर्खता का परिणाम

दशहरा के दिन करीब आते जा रहे है। एक दिन मन मे खयाल आया कि क्योँ न हम इसे अलग तरीके से मनाए। केवल पुतले को जलाने से क्या होता है? इससे केवल प्रदुषण और धन बर्बादी होती है। बहुत सोचने के बाद मन मे खयाल आया कि हम इस बार रावण तो जरुर जलाँएगे
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व्यक्ति के दो रुप

किसी स्थान पर एक महान चित्रकार रहता था। एक बार उसने बाल कन्नहिया का चित्र बनाना चाहा। उसने अनेकोँ चित्र बनाए पर उसे एक भी पसंद नहीँ आया। वह उदास रहने लगा। पंरतु एक दिन रास्ते मेँ चित्रकार ने एक बहुत सुन्दर, मासूम, भोला, तैजस्वी, मनमोहक, बालक देखा। उसके देखते ही उसके मन मे क्रष्ण
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Hindi Story: मुझे एकता चाहिए by Ashish Ghorela

एक बार चार व्यापारी (हिन्दू, मुस्लमान, सिक्ख, और ईसाई) तागेँ मे जँगल से गुजर रहे थे। अचानक ऊँचे रस्ते पर घोड़े को एक काला साँप दिखाई दिया और घोड़ा कुदने लगा। जिससे ताँगा निचे गहराई मे चा गिरा। आवाज सुनकर नजदिक से एक लकड़हारा दौड़ा आया। उसने उन चारोँ की मदद की। जैसे ताँगे को
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