घर पधारी सुनहरी परी – सचिन अ. पाण्डेय

घर पधारी सुनहरी परी – सचिन अ. पाण्डेय

घर पधारी सुनहरी परी बरखा-सी इठलाती, लोगों को हर्षाती; सौम्यता भरी कलियों-सी, घर पधारी सुनहरी परी| माँ-बाप की यों दुलारी, जीवन से ज्यादा प्यारी; अंतर में सभी के बसती, खुशियों का गीत रचती; घर पधारी सुनहरी परी| पढ़-लिखकर हुई सुशोभित, ज्ञानसन्दूक किए अर्जित; शिक्षा का पाठ पढ़ाती, घर पधारी सुनहरी परी| संघर्ष-भरे क्षण को भी,
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सूखा गुलाब (एक प्रेम कहानी) लेखक: राहुल रेड

एक प्रेम कहानी: प्रेम कहानी: उसे याद है वो सूखा हुआ गुलाब, याद है निशा के मेहँदी वाले हाँथ, याद है वो ठहरा हुआ वक्त और आँखों ही आँखों में बातें, याद है निशा के आँसू कैसे गालों का सफर करते हुए ठोड़ी पर आकर रुक जाते थे और बारिश की बूंदों की तरह टप
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