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परिवार- की कीमत

एक गांव में रोहन नाम का एक बच्चा रहता था। वह चौथी कक्षा में पढ़ता था। रोहन के परिवार में उस के दादाजी, दादी मां, मां- पिता जी और एक बड़ी बहन थी। रोहन से सब बहुत प्यार करते थे,सब उसका बहुत ख्याल रखते थे। रोहन की दीदी उसको पढ़ाई करवाती उसकी हर काम में बहुत मदद करती थी।पर रोहन दीदी के उपर गुस्सा करता और कहता कि मुझे मत पढ़ाओ मुझे आप से नहीं पढ़ना है।उसकी मां – पिता जी भी उसने खाने को कहते पढ़ने को कहते पर वह सब पर गुस्सा करता रहता था। कहता कि मुझे अकेले रहना है।मुझे से बात मत करो ।फिर एक दिन दादी मां ने एक तरकीब सुझाई रोहन को परिवार की कीमत समझाने के लिए।अगले दिन रोहन के उठने से पहले सब घर में पीछे वाले गार्डन में चले गए।रोहन उठते ही मां को पुकारने लगा नहीं मिलने पर वह फुट – फुट कर रोने लगा सब उसे छुप कर देख रहे थे फिर मां आकर उसे गले से लगा ली।फिर दादी मां ने रोहन को समझते हुए कहा कि बेटा हम सब तुमसे बहुत प्यार करते है सब तुम्हारा अच्छा चाहते है पर तुम सब पर गुस्सा करते हो।अब समझ आया कि थोड़ी देर हम तुम्हारे साथ नहीं थे तो तुम कितने परेशान हो गए थे,अब सोचो यदि पूरे समय साथ नहीं रहेंगे तो तुम भी नहीं रह पाओगे इसलिए अपने परिवार में सब की इज्जत करो सब की बात मानो और खुशी से रहो।।
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