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बाल दिवस पर विशेषः चाचा नेहरू के स्वास्थ्य का रहस्य-वीरेंद्र देवांगना

बाल दिवस पर विशेषः
चाचा नेहरू के स्वास्थ्य का रहस्यः
एक बार एक व्यक्ति पंडित जवाहरलाल नेहरू से मिलने आया। बोला,‘‘यदि आप इजाजत देे, तो मैं आपसे कुछ पूछना चाहता हूं।’’
पंडित नेहरू ने पूछने की अनुमति दे देी। उस व्यक्ति ने कहा,‘‘आप इस उम्र में भी ताजे गुलाब की तरह स्वस्थ और आकर्षक लगते हैं, जबकि आपके ऊपर काम का बोझ ज्यादा है, पर आपको देखकर लगता है कि जैसे आप पर उम्र का कोई असर ही नहीं है।’’
यह सुनकर नेहरूजी हंसकर बोले-अरे भाई, यह तो बहुत ही सहज है। कोई व्यक्ति केवल तीन बातों पर ध्यान दे, तो वह भी हमेशा तरोताजा रह सकता है। पहली बात तो यह कि मैं बच्चों से घुल-मिल जाता हूं। बच्चों के साथ बच्चा बनकर खेलने में आनंद आता है और दिल को सुकून मिलता है।
दूसरी बात, मैं कुदरत के सुंदर दृश्यों से गहरा संबंध रखता हूं। पहाड़, नदी, झरने, पक्षी, चांद, सितारे, हरे-भरे जंगल और हवाएं भी मुझे ताजा रखती हैं।
तीसरी बात, ज्यादातर लोग छोटी-छोटी बातों में फंसकर तनावग्रस्त हो जाते हैं। मैं ऐसा नहीं करता। जिंदगी को लेकर मेरा नजरिया बिलकुल अलग हैं। जीवन है, तो समस्याएं भी होंगी। इसलिए सबका मुकाबला धैर्य और शांति से करें। यह जान लीजिए कि समस्याएं हमेशा रहेंगी। यदि हम उनसे डरकर तनावग्रस्त हो जाएं, तो हमारा जीवन संकटग्रस्त हो जाएगा।
नेहरूजी की बात से वह सज्जन संतुष्ट हो गए। फंडा यह कि जो व्यक्ति बच्चों के समीप रहे, प्राकृतिक नजारों को देखकर आनंदित हो और समस्याएं आने पर घबराए न, वह व्यक्ति हमेशा स्वस्थ रहता है और कार्य उसे थका नहीं सकता।
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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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