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एक छोटा नन्हा बंदर-किरंजनी

एक बार बसंत नामक गांव में अचानक से बंदरों का आगमन हुआ लोग उन सब से बहुत परेशान थे क्योंकि वह उनकी फसलों को खराब कर रहे थे और यही नहीं वह रात को उनके घर से सामान भी चुराते थे लोग परेशान होकर उन्हें लाठियों से मारते थे और अपने खेतों से भगाते रहते थे कई सारे बंदर बुरी तरीके से घायल हो गए उन्हें बहुत छोटे लगी और उन्हें धीरे धीरे खेतों में और घरों में चोरी करना बंद कर दिया क्योंकि उन्हें पता लग गया था कि ऐसा करने पर उन्हें बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है पर एक दिन एक बूढ़ा आदमी रात का खाना बनाने के लिए अपनी रसोई में जाता है जो कि आगन के दूसरी तरफ होता है वह बूढ़ा आदमी बहुत ही गरीब होता है उसका छोटा सा घर और छोटा सी रसोई होती है जब वो रसोई में खाना बनाने जाता है तो देखता बंदर का बच्चा उसकी टोकरी मैसेज एक गली हुई सब्जी को खाने की उठाने की कोशिश कर रहा था क्योंकि वह टोकरी बंद थी और वह छोटा सा बंदर अपने छोटे से हाथ से उसे खोलने की कोशिश कर रहा था बूढ़ा आदमी है देख कर बहुत पिघल जाता है क्योंकि उस बंदर के हाथ इतने छोटे-छोटे और इतना प्यारा कि उसे देखकर तो कोई भी पिघल जाएगा फिर बूढ़ा आदमी उस टोकरी को खोलकर उसमें से उसे एक मूली दे देता है क्योंकि वह बूढ़ा आदमी बहुत गरीब होता है उसके पास खाने को कुछ ज्यादा नहीं है इसलिए वह बस एक मूली देकर अपनी रसोई घर से बाहर निकाल कर अपने घर के बाहर की ओर छोड़कर इशारों में उसे जाने को कहता है पर हो नन्हा बंदर है उसे कुछ भी नहीं समझ आता उसे लगता कि बूढ़ा आदमी उसके साथ खेल रहा है तो वह उसकी तरफ और आकर उछलने लग जाता है और उसके कंधे में झड़ जाता है बुरा आदमी देख कर बहुत हैरान और परेशान हो जाता है क्योंकि उसके पास पहले से ही खाने को कुछ नहीं है और बंदर नन्ना बंदर और उसके पास आ जाता है और लोग भी बंदर से बहुत परेशान हैं अगर उन्हें पता चला कि उसने इस बंदर को पाल लिया है उसके लिए परेशानी हो जाएगी और यह बंदर इतना छोटा है इस तो उसे उसकी मां के पास होना चाहिए ना कि यहां बंदर से लोग बहुत परेशान हो चुके थे इसलिए अगर वह से देख लेंगे तो इसे भी मारने लग जाएंगे और कहीं दूर छोड़ कर आ जाएंगे आदमी उसने बंदर को छुपा कर अपनी कुटिया में ले जाता है मां बूढ़ी औरत बैठी होती है और देखती है कि उसका पति अपने कपड़ों की नीचे क्या लेकर आ रहा है जब जब बूढ़ा आदमी अपनी कपड़े के अंदर से बंदर निकालता है तो बूढ़ी औरत हैरान हो जाती है और साथ ही में परेशान कि यह कहां अब यह कहां से आ गया और अपने पति से उसे वापस छुड़ाने की बात करती हैं क्योंकि पहले से ही उनके घर में खाने की तंगी है और इस बार फसल तो बंदरों ने खराब ही कर दी तो वह इस बंदर को अपने पास नहीं रख सकते वैसे ही नन्हा बंदर उछल कर बूढ़ी औरत के सिर पर बैठ जाता है और मूली खाने लग जाता है जो उससे बूढ़े आदमी ने दिया था फिर वह सोचते हैं कि अब वह क्या करें तब वहसोचते कि अब बहुत रात हो गई है तो मैं इसे सुबह-सुबह जंगल में छोड़ कर आ जाएंगे बूढ़ी औरत पूछती है कि खाना नहीं बनाया तो बूढ़ा आदमी कहता है की कुछ है ही नहीं बस एक मूली थी जो मैंने इस नन्हे बंदर को दे दी थी और वह दोनों अब सोने की तैयारी करते हैं बूढ़ी औरत बंदर को अपने बगल में चलाते हैं और उसके ऊपर हाथ फेरती हैं सोते हुए ब नन्हा बंदर बहुत ही प्यारा दिखता है और सुबह-सुबह बूढ़ा आदमी उसे जंगल में छोड़ने के लिए जाता है जंगल में अंदर तक ले जाकर उसे नीचे उतार देता है ऑफिस जाने लगता है पर बंदर को बूढ़े आदमी से लगाव हो गया वह से छोड़कर नहीं जाना चाहता वह हर बार उसके पीछे आ जाता है पर बूढ़ा आदमी बूढ़ा आदमी भी परेशान है क्योंकि उसके घर में खाने को कुछ नहीं तो वह इसे कैसे पाल सकता है और उसे लगता है कि इस नन्हे बंदर को उसकी मां के पास होना चाहिए घर में कोई भी बंदर नहीं दिखाई दे रहा था क्योंकि सारे बंदर इस गांव को छोड़कर दूर चले गए थे बूढ़ा आदमी सोच में पड़ जाता है कि आप क्या होगा और बंदर उससे दूर जा ही नहीं रहा था फिर आखिरकार वह यह सोच लेता है कि वह नन्हे बंदर को अपने घर ही ले जाएगा वह उसे बच्चे की तरह उठाकर अपने घर आ जाता है बूढ़ी औरत बहुत परेशान होती है क्योंकि नन्हा बंदर अपने घर नहीं जा पाया और यहां पर भी उसे कुछ सही से खाने को नहीं मिल पाएगा फिर बूढ़ा आदमी दूसरों के खेत में काम कर कुछ धान ले लेता है जिससे कि कुछ खा पाए और नन्हे बंदर को भी खिला पाएं तीन-चार दिन बाद बंदर उस घर का सदस्य ही बन गया था क्योंकि बूढ़ा आदमी और बूढ़ी औरत उसे अपने बच्चे की तरह पढ़ रहे थे वह मजदूरी करने के लिए दूसरों की खेतों में काम करते थे बूढ़े होने के बावजूद भी वह इतना काम कर धान खरीद कर अपना गुजारा चला रहे थे और बंदर को भी इन्हें नन्हे बंदर को पाल रहे थे एक दिन रात को कई बंदर गांव में दोबारा आ गई और हर घर में कुछ ढूंढने लग गई जैसे कि उनको कुछ सामान खो गया है जब बूढ़े आदमी के घर पहुंचते हैं तो देखते हैं कि वहां वह नन्हे बंदर सो रहा है नन्हे बंदर की मां उसे देख कर उसके पास आ जाती है फिर उसे उठाने लग जाती है तभी बूढ़ी औरत है बूढ़ा आदमी उठ जाता है और देख कर आराम हो जाता है कि इतने सारे बंदर गांव में दोबारा आ गए फिर उन्हें पता लग जाता है कि यह बंदर नन्ही बंदर की मां है तो वह ने बंदर को उसके पास दे देती हैं पर मरना बंदर बूढ़े आदमी और औरत को देखने लग जाते हैं मांअपने बच्चे को देखकर बहुत खुश होती हैं नन्हा बंदर अपनी मां के पास नहीं जा रहा था तो बूढ़ा आदमी उसको भगा देता है और वह नन्हा बंदर अपनी मां के पास चला जाता है और सारे ही बंदर गांव से दूर चले जाते हैं और रोज बुरे आदमी और औरत को बंदर की बहुत याद आती थी पर वो खुश थे कि नन्हा बंदर अपनी मां के पास खुश है क्या सोचकर वह भी खुश हो जाते हैं क्योंकि उन्हें नंदिनी बंदर के साथ बहुत खुशहाल दिन बिताए थे उन्हीं को याद करके हंसते और उसके बारे में एक दूसरे से बात करते रहते हैं और नन्हाबंदर भी अपनी मां के साथ जंगल में बहुत खुश था

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