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दोषी कौन -अजय-प्रताप सिंह

रामराज में आग लगा दी ,राजनीति की चालो ने ।
गैरों को घर में बैठा कर , भेद दिया घर वालों ने ॥
प्रेम अहिंसा का अमृत था ,गांधीजी की लुटिया में ,
समझ भिक्षु रावण ला पाले ,पावन कुटिया में,
राज पाठ दे राम लुभाये ,हरी सिया कगालो ने ।
रामराज में …… चालों ने ॥
गिद्ध राज की दृष्टि आज, माया पर जमी हुई है,
लंकेश लिए सीता जाते ,गहनों से सजी हुई है,
‘गहने हाथ नहीं लगने हैं ,पडके उच्च खयालों मे ।
रामराज में …….. चालो ने ॥
राम भक्त हनुमान आज , कायल है रामादेशों के,
चमचा बने राम बैठे हैं ,आज अनेकों देशों के ,
बिना युद्ध ही मिल जाएगी , बहके है इन्हीं खयालों में ।
रामराज में … चालो ने ॥
बोटी -बोटी खा जाए ,चाहे रावण इस सीता की,
ऑच आए तुम पर ना वीरों, कसम तुम्हें है गीता की,
पत्थर दिल इतने बन जाओ ,गिनती हो दिल -वालों में ।
रामराज में ……. चालों ने ॥
एक रोज ऐसा आएगा , लखन नींद से जागेंगे ,
मात प्रेम से विह्वल होकर ,अस्त्र-शस्त्र ले भागेंगे,
नशा पिला कर लखन सुलाये, पूछे गए सवालों ने ।
रामराज में …. चालो ने ॥
एक रोज यह प्रजातंत्र, मिट्टी में मिल जाएगा,
आज बचा लो ,आज बचा लो ‘हर रावण चिल्लाएगा ,
गंगा का सीना फट जाएगा, खून देखकर नालों में ।
रामराज मे ………. चालो ने ॥

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ajai-pratap-singh

ajai-pratap-singh

My name is Ajai pratap Singh. M . A . B.Ed. 1996 ( c c s uni . Meerut ) Unemployed . I am a simple farmer.I lives in charora .I am p.t.a in siksha sadan inter College jatpura.

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