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डूबती संस्कृति का तिनका . ‘ साहित्य’-अजय-प्रताप सिंह

कृष्ण पूछते पारथ से ।
संस्कार गए क्या भारत से ॥
कर्म योग ,पुरुषार्थ कहां,
सेवा निस्वार्थ कहां,
अतिथि सत्कार कहां,
कहां शास्त्रार्थ विशारद से । कृष्ण …
संस्कार … : …… से ॥

पित्र कहां और माॅत कहाँ’
पहनावा और शास्त्र कहां,
सहयोग और विश्वास कहां,
लगे सारे शब्द अखारत से । कृष्ण …..
संस्कार ……….. से ॥

क्यों अबला निःवस्त्र हुई,
रक्षक आभा क्यों ध्वस्त हुई,
मैं हो गई क्यों खंडहर,
उठते प्रश्न इमारत से । कृष्ण : ……..
संस्कार …….. से ॥

बनी क्यों धर्मशाला ‘ बारात घर ,
हर क्षेत्र में है भटक चारों प्रहर,
प्रकृति क्यों है खफा और रुष्ट सी ,
शायद पाश्चात्य तिजारत से । कृष्ण ……
सस्कार …………. से ॥

गुरु ,मात -पिता , सम्मान दया,
जाति धर्म और शर्मोह्या
व्याख्या इन्हीं की करते सही,
इस साहित्य इबारत से ।
हरि कहते साहित्य विशारद से ।
संस्कार गए क्यों भारत से ॥ कृष्ण ……

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