गांव के कुंवारे-अशोक कुमार कतारे

गांव के कुंवारे-अशोक कुमार कतारे

हमारी शादी को भगवान ,
भेज दो तुम कोई मेहमान ।
नाथ सुनो अब विनती मेरी ,
इतनी क्यो करते हो देरी ।
आपका सेवक में नादान ।।
भेज दो तुम कोई मेहमान ,
देखो सबकी हो गई शादी ,
उमर निकल गई मेरी आधी ।
रोज हम करते पूजा दान।।
भेज दो तुम कोई मेहमान,।
गलती हमसे हो गई भारी ,
अब तक तुम्हारी कथा विषारी ।
उठू शत बार पकड़कर कान ।।
भेज दो तुम कोई मेहमान,.
जो जो मेरे संगी साथी ,
उनके बाप खिला रहे नाती।
प्रभु यह मेरा है अपमान।।
भेज दो तुम कोई मेहमान,
अब जो आबे करके जावे,।
हलवा पूरी ना खा जावे ।
नाथ उसको देना सदज्ञान ।।
भेज दो तुम कोई मेहमान ,
तुम सब जानत अंतर्यामी ,
सेवक में जो जो है खामी।
जन्म भर मानू में एहसान ।।
भेज दो तुम कोई मेहमान,……

 

       अशोक कुमार कतारे

आज़ादपूरा, ललितपुर, उत्तरप्रदेश 

 

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