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व्यंग्य-लेखःः प्याज की महिमा-वीरेंद्र देवांगना

व्यंग्य-लेखःः
प्याज की महिमा
जब से प्याज के दाम बढ़ गए हैं, तब से प्याज का भेजा खराब हो गया है। उसका दिमाग सातवें आसमान पर जा पहुंचा है। वह किसी को कुछ नहीं समझ रहा है।
सबको तुच्छ व नाचीज समझकर हिकारत की नजर से देख रहा है। अपने-आप को उच्चवर्ग का समझकर सब सब्जियांे को दूर-छूर करते हुए सेब, अनारदाना, चिकू, संतरा, मुसंबी जैसे महंगे फलों के साथ उठ-बैठ रहा है।
वह किसी सब्जी से सीधी मुंह बात तक नहीं कर रहा है। कोई उससे बात करना भी चाह रहा है, तो इतरा कर उल्टा जवाब दे रहा है। जब थैले में भरकर सब्जियों के साथ किसी के घर जाता है, तब अपने शतक लग चुके भाव के कारण सबसे इतराता है और स्वयं को शतकवीर कहता है।
इससे सब सब्जियों के साथ आलू चिंतित है कि मैं भी प्याज की तरह धरती को फाड़कर निकलता हूं, किंतु मेरी पूछ-परख प्याज के सामने घट क्यों गई है?
कहीं प्याज को गुपचुप रिजर्वेशन तो नहीं मिला हुआ है। जबकि आलू और प्याज एक ही खेत की कोख से उपजी हुई फसलंे हैं। यह तो वैसे ही हुआ, जैसे एक-सी परीक्षा में आरक्षित और अनारक्षित के लिए अलग-अलग कटआफ मार्क निर्धारित कर दिए जाएं और अनारक्षण के ऊपर आरक्षण को तवज्जो दे दिया जाए।
यही नहीं, पदोन्नति में भी योग्य अनारक्षित के ऊपर अयोग्य आरक्षित को पदोन्नति देकर अनारक्षित को खून के आसूं रुलाया जाए और उसके ऊपर हुक्म फरमाया जाए।
इतना ही नहीं, प्याज कटते समय आंसू तक निकाल देता है। इतना आसूं तो पाखंडी इंसान रोते समय भी नहीं निकालता। फिर भी उसे फ्रिज से निकालकर तिजोरी में रखा जा रहा है और सोना-चांदी की इस्तेमाल किया जा रहा है।
घर में थैले से निकलकर प्याज जब सस्ती सब्जियों पर रुतबा दिखाया करता है, तब लगता है कि वह महाअघाड़ी सरकार का प्रवक्ता बन गया है। उसपर गृहलक्ष्मियां जब चाकू चलाती हैं, तब बीसों मर्तबा सोचती हैं कि महंगे प्याज को काटूं कि नहीं या सरसों, जीरा, लहसुन या मेथी के छौंक या बघार से काम चला लूं। यह तो प्याज का महिमामंडन हुआ।
इसपर प्याज का कुढ़कर कहना है कि जब उसको भाव नहीं मिलने पर उसे नालियों, सड़कों और अभ्यारण्यों में बेरहमी से सड़ने के लिए फेंका जा रहा था, तब किसी सब्जी ने उसके पक्ष में मुंह क्यों नहीं खोला? यह तो वैसा ही हुआ, जैसे महागठबंधन की पार्टियां चुनाव हार जाने के बाद अपने गठबंधन की सहयोगी पार्टियांे के साथ किया करती हैं। इसे ही कहते हैं-अच्छा-अच्छा गप-गप और बुरा-बुरा थू-थू।
इससे प्याज और बाकी सब्जियांे में ठन गई है। वे उससे जल रहे हैं। ईष्र्या कर रहे हैं और देख लेने की धमकियां दे रहे हैं। लेकिन, प्याज को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। उसका इठलाना जारी है। इससे बेचारी सब्जियांें का बुरा हाल है। वे रुआंसी हो गई हैं और अपने तकदीर को कोस रही हैं।
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