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व्यंग्य-कथाः: किसान की श्रद्धांजलि सभा::-वीरेंद्र देवांगना

व्यंग्य-कथाः
किसान की श्रद्धांजलि सभा
एक दिन एक किसान की मौत हो गई। किसान जिंदगीभर खेतों में खपता रहा और खप-खप कर अस्थिपंजर बना रहा। उसके तीन पुत्र और तीन पुत्रियां थीं। उसकी शवयात्रा में घर के नाती-पोते, बेटे-दामाद, अड़ोसी-पड़ोसी और चरवाहे-दरवाहे मौजूद थे।
शवयात्रा से लौटते वक्त छोट भाई ने बड़े भाई से कहा, ‘‘शाम को बाबा की श्रंद्धाजलि सभा रख देते हैं।’’
‘‘कैसी श्रद्धांजलि और कैसी सभा? बाबा ने तो फूटी कौड़ी की बचत नहीं की है।’’ बड़े भाई ने हताशा भरे लहजे में कहा।
‘‘वे इस घर के मुखिया थे। हमारा इतना तो दायित्व बनता है कि उनकी याद में कोई सभा-वभा करें।’’ मंझले भाई ने बड़े भाई को दायित्वों का स्मरण कराया।
‘‘ओह! अब मुझे तुमसे सीखना पडे़गा? वे अस्पताल में भरती थे, तब काफी व्यय करना पड़ गया था। हमने पहले साहूकार से उधारी मांग-मांगकर इलाज करवाया, फिर खेत गिरवी रख दिया। अभी तक साहूकार का 1 लाख रुपया से ज्यादा का कर्जा चढ़ चुका है।’’ बड़े भाई ने खुलासा किया।
‘‘उंह! उधारी चुका देंगे। चोरों की तरह कौन-से गांव छोड़कर भागे जा रहे हैं हम। हमें सिर्फ साउंड-सिस्टम, फ्लैक्स, दरी, चादर, शामियाना, चित्र, हार व चाय-नाश्ता का प्रबंध करना पड़ेगा। इतने में अच्छी सभा हो जाएगी।’’ छोटा जिद्द पकड़ लिया।
‘‘बी प्रेक्टिकल! क्या श्रद्धांजलि सभा नहीं करने से उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी? घर में भूंजी भांग नहीं है और तुमकों श्रद्धांजलि सभा की पड़ी है।’’ बड़े भाई ने छोटे भाइयों को डपटा, तो वे कुछ देर के लिए निरूतर हो गए।
‘‘इससे हमारा भी सम्मान गांव में बना रहेगा। पिछले महीने जब साहूकारिन मरी थी, तब साहूकार ने श्रद्धांजलि सभा की थी कि नहीं। इससे उनका गांव में रौब बढ़ गया था। उसने तो गांववालों को मृतक भोज भी दिया था।‘‘ थोड़ी देर बाद मंझला हिम्मत कर बोला।
दाह संस्कार से लौटने के बाद सबके मुंह लटके हुए थे। घर में मातम पसरा हुआ था। रोना-गाना लगा हुआ था। मिलने-जुलनेवाले आते थे और किसान को अच्छा आदमी साबित कर लौट जाते थे।
ज्यों-ज्यों रात बढ़ने लगी, तीनों भाई बेचैन हो उठे। इधर आने-जानेवाले भी कम होने लगे। बड़ा गंजेड़ी, मंझला मंदेड़ी और छोटा भंगेड़ी था। अब इनसे रहा नहीं गया। वे उठ-उठकर अपने-अपने अड्डे की ओर निकल पड़े, ताकि बाबा की आत्मा की शांति के लिए अड्डों की महफिल सजाकर श्रद्धांजलियां दे सके।
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विशेष टीपःः वीरेंद्र देवांगन की ई-रचनाओं का अध्ययन करने के लिए google crome से जाकर amazom.com/Virendra Dewangan में देखा जा सकता है।

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Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

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