अक्सर पुछ लेते हैं लोग मेरी खामोशी की वजह – सुजीत कुमार

अक्सर पुछ लेते हैं लोग मेरी खामोशी की वजह – सुजीत कुमार

अक्सर पुछ लेते हैं लोग मेरी खामोशी की वजह और हम खुद को……… बेजुबान बता देते हैं। ये तो फितरत है उनकी …हमें आंख दिखाना हम उन पर हुए खुद का ऐहसान बता देते हैं। जरुरत पड़ती है उनकी, जब हमे गर्दिशों में व्यथा सुनाकर खुद को ही परेशान बता देते हैं। जब कोशिश की
Complete Reading

इबादत तो की होती – श्याम कुंवर भारती

बुजुर्गो दुआ सलाम न सही सामने थोड़ी सराफ़त तो की होती | दुआओ बड़ा असर होता मान खुदा थोड़ी इबादत तो की होती | आज तुम जवा हो क्या कायम रहेगी ये जवानी तेरी उम्र भर , बचा रखा होता जोश ए जनून थोड़ी हिफाजत तो की होती | उनको लगता है मंडरा रहे है
Complete Reading

जीवन की आधी रेस पार हो गया हूँ मैं – राहुल रेड

जीवन की आधी रेस पार हो गया हूँ मैं घर पर बैठे बैठे बेकार हो गया हूँ मैं लतीफे सुनकर भी हँसी नहीं आती है आजकल कितना बेजार हो गया हूँ मैं कितने दिनों से कोई गजल न लिखी बीमारों के साथ रह बीमार हो गया हूँ मैं कभी अच्छा तो कभी बुरा बन जाता
Complete Reading

गलत क्या-चेतन वर्मा

इस जहां में चांद भी अधूरा है  चांदनी के बिना  सारी दुनिया में गम है  गम में हम हैं  और हम भी रो दिए  तो गलत क्या सबको आस है सच्चे प्यार की  प्यार में थोड़ा हम भी भटक गए  तो गलत क्या    यूं तो जिंदगी में बहुत कुछ मिलता है  पर जो हाथों
Complete Reading

हजार काँटों के बीच गुलाब है औरत-नेहा श्रीवास्तव

है पुरुष इमारत तो आधार है औरत , हजार काँटों के बीच गुलाब है औरत। सूरज के उगने से पहले जिसकी सुबह होती है, पी जाती है हर गम को छिप -छिप कर रोती है। देवताओं की मूर्ति पर चढ़ने वाली फूल है औरत, करे कोई अन्याय तो शूल है औरत। हारे हुए चेहरे की
Complete Reading

जब नाम तेरा लिखने को-श्याम सुन्दर सैनी

जब नाम तेरा लिखने को कलम हो बेचैन, कोई ग़ज़ल एसी लिखकर गुनगुना लेता हूं.. बैठकर यूं तन्हा कभी उस नदिया पर, मन अपना में अक्सर बहला लेता हूं.. हैरां है लोग मेरी इबादत देखकर, तेरी ओर जाती हर सड़क पे  सर झुका देता हूं.. जब नाम तेरा लिखने को.. यह दुनिया मेरी अपनी नहीं,एक
Complete Reading

जुमले वादे सपने नारे-सुशील त्रिवेदी

जुमले, वादे, सपने, नारे, क्या-क्या जाने रखते हैं। खुद को बहलाने को हम खुद, खूब बहाने रखते हैं।। इश्क, तिजारत, और सियासत, साख का सारा खेल यहां, हम सहेज कर ख़त, हुंडी, अखबार, पुराने रखते हैं।। नुची हुई गौरैया के पर देख के ये अफसोस हुआ, क्यों चिड़ियों की खातिर छत पर अब भी दाने
Complete Reading

गजल-राहुल रेड

जंगल जंगल नाँचता फिरूँ वो मोर नहीं हूँ कमजोरी मत ढूँढो इतना कमजोर नहीं हूँ क्यों लगाते हो मुझ पे इल्जाम चोरी का बिना पूँछे दिल चुरा लूँ वो चोर नहीं हूँ माँ बाप के बिना मैं कुछ भी तो नहीं बिना पतंग के उड़ जाऊँ वो डोर नहीं हूँ जितनी जरूरत हो उतना ही
Complete Reading

मिलो ना एक बार हम तुम फिर से – आनंद मिलन

मिलो ना एक बार हम तुम फिर से, बात जो अधूरी है पुरी कर ले फिर से। यादें जेहन में अब भी हिलोर मारती है, कूछ देर सही दूजे की सूरत देख ले फिर से। कुछ तड़प ताउम्र होनी चाहिए दिल में, इसी बहाने दूजे को याद कर ले फिर से। तुम्हें पाने का शौक
Complete Reading

काश ! तुम मेरी होती – आनन्द मिलन

काश ! तुम मेरी होती ये सारा जग मेरा होता, जिन्दगी की ऊँची नीची ढलान मिलकर काट रहा होता। ना मैंने इजहार किया और ना तुमने इनकार किया, वो कैसा प्यार था ? जो हम दोनों ने कबूल किया। नयनो की भाषा पढ़ने में हम उस्ताद थे, मगर, जूबान को खामोश ही रखना जाने क्यों
Complete Reading

Create Account



Log In Your Account