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Category: ग़जलें

Hindi
SHARIQ-RABBANI

खुद को निसार-ए-जाम किये जा रहे है लोग

खुद को निसार-ए-जाम किये जा रहे है लोग जीने का इहतेमाम किये जा रहे है लोग।। शब खून शाम ही से कुछ ऐसे कि अलअमा

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Hindi
SHARIQ-RABBANI

फरेबे हुस्न से खुद को बचा लिया हमने

फरेबे हुस्न से खुद को बचा लिया हमने खुदा का शुक्र कि दामन छुड़ा लिया हमने।। तुम्हारे गम को जो दिल में बसा लिया हमने

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Hindi
SHARIQ-RABBANI

कोई किसी बेबस का मददगार कहां है

कोई किसी बेबस का मददगार कहां है मजबूर का इस दौर में ग़मख्वार कहां है। अल्लाह का अब कोई परस्तार कहां है इस दौर का

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