पढ़ाकर तो देखो Gazal By Rahul Red

भँवर में सही कश्ती को मुड़ाकर तो देखो
बारिश में पैर जमीं पे गड़ाकर तो देखो

कुछ भी है मुमकिन अगर ठान लें हम सब
हाँथ समानता की ओर बढ़ाकर तो देखो

भेदभाव ख़त्म कर अब अपनी बेटी को
शिक्षा के शिखर पर चढ़ाकर तो देखो

हुनर है इनमे दुनियाँ को बदलने का
बेटियों को बेटों सा पढ़ाकर तो देखो

हैं इनमे सुनीता और कल्पना सी उड़ान
इनके पंखो को फड़फड़ाकर तो देखो ।

© राहुल रेड
फर्रुखाबाद यूपी

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