ग़ज़ल-जीतेन्द्र कुमार गुप्ता

ग़ज़ल-जीतेन्द्र कुमार गुप्ता

आओ अंतर्मन में दीप जलाएं
धरा से तम को दूर भगाएं ।

हुआ अयोध्या पूरा जगमग,
वनवास बीता राम जब आएं।

हो न लक्ष्य आंखों से ओझल
संकल्पित हो कर क़दम बढ़ाए।

त्योहार दिवाली खुशियों का है,
कलुष भूलाकर गले लगाएं ।

स्वच्छ देश हो,स्वच्छ हो मानस
स्वच्छता का ही अलख जगाएं।

मानवता की हत्या न कर,
मंदिर मस्जिद सदा बनाएं।

 

  Jitendra Kumar Gupta जीतेन्द्र कुमार गुप्ता

     अररिया, बिहार

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