नहीं सीखा Gazel By Rahul Red

तनहाई की महफ़िल में मुस्कान नहीं सीखा
नाजुक फूलों सा कभी मुरझाना नहीं सीखा

टूटा हूँ बहुत लेकिन गिर-गिर के सम्भला हूँ
कैसी भी हो राह मगर रुक जाना नहीं सीखा

भूल गए वो लोग जिनका साथ दिया हर पल
उनकी तरह मैंने अहसान जताना नहीं सीखा

कड़वा सच बोलता हूँ भले नफरत करे जमाना
झूठी तसल्ली देकर कभी समझाना नहीं सीखा

सताया बहुत था कभी इस ज़माने ने फिर भी
अनजाने में दिल किसी का दुःखाना नहीं सीखा

आँखों भी बयाँ कर देती हैं दिल की सारी बातें
कुछ बातों को लफ्जो ने मेरे बताना नहीं सीखा

दिल लगता है एक बार ही दुनियाँ में किसी से
इस दिल को मैंने बार-बार लगाना नहीं सीखा।

© राहुल रेड
फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश
संपर्क 8004352296

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