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पलकें-दिव्यांश-सिंह

गर मेरी जिंदगी में तेरा हा जो मिल जाए,
सच कहता हूं मेरी जां, मेरी जां ही बदल जाए|
1… तुम एक तमन्ना हो,
तुम ही हो अब जीवन|
तुमको चाहा जब से,
मेरा प्यासा है यह मन|
मेरे स्वप्न में तुम आओ,
मुझे घायल कर जाओ |
मेरे प्यासे – प्यासे मन में,
कुछ प्रीत संभल जाए ||
गर मेरी जिंदगी में तेरा हां जो मिल जाए|
सच कहता हूं मेरी जां मेरी जां ही बदल जाए||

2… परियों के जैसी तुम,
सुंदर और चंचल हो |
तुम हार के जीत भी हो,
तुम मेरा दर्पण हो ||
तुम साथ हमारे आओ,
हम साथ तुम्हारे आए |
दोनों को मिलने से, जीवन अपना बन जाए
गर मेरी जिंदगी में तेरा हां जो मिल जाए|
सच कहता हूं मेरी जां ,मेरी जां ही बदल जाए |
सच कहता हूं मेरी जां मेरी जां ही बदल जाए

      दिव्यांश सिंह नाराज़
                रायबरेली, उत्तर प्रदेश

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