नवीनतम हास्य-व्यंग रचनाएँ

कर्जदार
Ranjana sharma
एक रहम दिल इंसान ने किसी अपने की मदद करना चाहा , क्योंकि वह मुसीबत में था, लेकिन उस मददगार को नहीं पता था कि उसका मदद क
51570
Date:
05-07-2022
Time:
12:14
सोने का अंडा
Aniket
कुछ साल पहले रामू नामक एक लकड़हारा था। उनकी पत्नी हेमा और दो छोटे बच्चे थे। हर सुबह रामू पास के जंगल में जाता और पूर
49410
Date:
05-07-2022
Time:
10:32
हँसना मना है
Aniket
शांति और अरुण अच्छे दोस्त थे। उन्होंने साथ में बहुत मस्ती की। उन्होंने कक्षा में रहस्य साझा किए। उन्होंने साथ में
49423
Date:
05-07-2022
Time:
07:06
जिसकी लाठी उसकी भैंस
Aniket
एक गाँव में एक दूधवाला रहता था। उसके पास बहुत सारी भैंसें थीं। वह अपनी भैंसों का बहुत ख्याल रखता था। वह अपना दूध अलग
49379
Date:
05-07-2022
Time:
09:35
रूप परिवर्तन
हुकम चन्द जैन
ग्रामीण बाप बेटे पहुंचे शहर की ऊंची इमारत में लिफ्ट के दरवाजे खुल बंद हो रहे थे देखा एक बूढ़ी औरत लिफ्ट के अंदर
47767
Date:
05-07-2022
Time:
05:00
बिन बुलाए मेहमान
Rambriksh, Ambedkar Nagar
कविता-बिन बुलाए मेहमान बड़े ठाठ से दावत खाने, पहुंचे गंगू भाई तन पर शूट बूट पांव में,टांग गले में टाई कभी घराती कभी
46124
Date:
05-07-2022
Time:
12:17
बेचैन दिल
SANTOSH KUMAR BARGORIA
बेचैन दिल ये मेरा जालिम, कुछ सुनने का अब नाम ना ले । बस दोष मढ़े सर औरो के, खुदपर कोई इल्ज़ाम ना ले।। चाहत तो थी क
40251
Date:
05-07-2022
Time:
10:32
दावत
Rambriksh, Ambedkar Nagar
मैं दावत खाने बैठा था कौन अपना कौन पराया मैं खुद अंजान कौन बिन बुलाए मेहमान किन्तु प्रेम का संगत अनूठा था, देख दे
38959
Date:
05-07-2022
Time:
12:45
शायरी
अभिषेक मिश्रा
शहर की आबोहवा में ,कुछ इस कदर परिवर्तन होने लगे हैं हुजूर ! खंडहर भी बयां करने लगे हैं, कि इमारत भी क्या शानदार थी।।
38080
Date:
05-07-2022
Time:
11:15
ये महंगाई की कैसी मार
Vijay singh
ये महंगाई की कैसी मार न ऊंचाई न आधार कब आलु प्याज सोने सम बन जाएं न जाने सोना कहां बिकवन आए हीरे का तो न कोई पार, ये
34664
Date:
05-07-2022
Time:
11:52
तू किताब होती तो
Rupesh Singh Lostom
तू किताब होती तो पढ़ के जान लेता अक्षरों के लिखाबटों से पहचान लेता कोहचान से अंशार या अंशार से कोहचान बना लेता
33400
Date:
05-07-2022
Time:
11:05
ढोंग
SANTOSH KUMAR BARGORIA
ढोंग बड़े मुझ ढोंगी में, स्वयं कर मैं देवी पूजा । और विरोध उनका मैं करता, जो करते मूर्तिपूजा ।। कलश स्थापना मैं घर
32601
Date:
05-07-2022
Time:
11:01