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करोना विषाणु

ज़ितना हो सके दूरियां बनाए रखो,
इसको
इस कोरोना विषाणु से खुद को बचाए रखो।

किसी के पास ना आना जाना,
कहीं हो ना जाए अपना भी बेगाना।

असली देशभक्त वही होगा,
जो कोरोना से बचा होगा।

यह कोरोना भी कितना स्वाभिमानी है?
न बिन दिया जाता है और ना ही बिन लिए आता है।
तो भाई क्यों मिलजुल कर खुद को मुसीबत में फंसाता है।।

हिंसा में औकात की बात करने वालों,
विषाणु की औकात से खुद को संभालो।

जब चीन वाले कोरोना से मौत की नींद में सो रहे थे, तब भारत वाले खुश होकर चैन की नींद सो रहे थे।

इस कोरोना ने मनुष्य को मछली बना दिया है,
हाथ लगाओगे डर जाओगे,
बाहर निकलोगे मर जाओगे।

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2 thoughts on “करोना विषाणु”

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