Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

असहयोग आंदोलन की पृष्ठभूमि और कार्यक्रम-वीरेंद्र देवांगना

असहयोग आंदोलन की पृष्ठभूमि और कार्यक्रम::
प्रथम विश्वयुद्ध से प्राप्त आर्थिक दुर्दशा, रौलेट एक्ट से असंतोष, मांटफोर्ड सुधारों का कुपरिणाम, जलियांवाला बाग हत्याकांड, खिलाफत आंदोलन के परिणाम के रूप में महात्मा गंाधी के द्वारा 1 अगस्त 1920 को असहयोग आंदोलन की घोषणा किया गया, जो 1 जनवरी 1921 को आरंभ हुआ।
इसका समर्थन लाला लाजपतराय की अध्यक्षता में कलकत्ता में सितंबर 1920 में हुए कांग्रेस के विशेष सम्मेलन तथा विजय माधवाचारी की अध्यक्षता में नागपुर में दिसंबर 1920 में हुए कांग्रेस के वार्षिक सम्मेलन में किया गया।
इसका लक्ष्य जहां ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत स्वशासन के बजाय स्वराज था, वहीं एनी बिसेंट, मोहम्मद अली जिन्ना व विपिन चंद्र पाल ने असहयोग आंदोलन से असहमति जताते हुए कांग्रेस त्याग दिया था। आंदोलन द्विपक्षीय था। एक-नकारात्मकता के साथ बहिष्कार तथा दूसरा-वैकल्पिकता के साथ रचनात्मकता। जैसेः-
ऽ सरकारी उपाधियों के त्याग के अंतर्गत नामचीन वकीलों ने वकालत का त्याग कर दिया। सीआर दास, मोतीलाल नेहरू, राजेन्द्र प्रसाद, सी राजगोपालाचारी, सरदार पटेल इन्ही अधिवक्ताओं में-से थे।
ऽ विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई। स्वदेशी, खादी एवं चरखा का प्रयोग किया गया।
ऽ सरकारी स्कूलों का बहिष्कार कर राष्ट्रीय शिक्षण संस्थाओं की स्थापना की गई, जिसमें जामिया मिलिया इस्लामिया-अलीगढ़, बिहार विद्यापीठ, काशी विद्यापीठ, गुजरात विद्यापीठ की स्थापना इसी समय की गई थी।
ऽ सरकारी अदालतों का बहिष्कार कर विवादों का निपटारा पंचायत के माध्यम से करने का प्रयास किया गया।
ऽ सरकारी नौकरियों का त्याग, विधानमंडलों व शासकीय समारोहांें का बहिष्कार तथा जनसेवा, नशाबंदी व अछूतोद्धार को अपनाया गया।
ऽ किसानों व महिलाओं ने आशा के विपरीत इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो चैरी-चैराकांड के रूप में सामने आया।
–00–

30 views

Share on

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn
Share on email
Email
Share on print
Print
Share on skype
Skype
Virender Dewangana

Virender Dewangana

मैं शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हूँ। लेखन में रुचि के कारण मै सेवानिवृत्ति के उपरांत लेखकीय-कर्म में संलग्न हूँ। मेरी दर्जन भर से अधिक किताबें अमेजन किंडल मेंं प्रकाशित हो चुकी है। इसके अलावा समाचार पत्र-पत्रिकाओं में मेरी रचनाएं निरंतर प्रकाशित होती रहती है। मेरी अनेक किताबें अन्य प्रकाशन संस्थाओं में प्रकाशनार्थ विचाराधीन है। इनके अतिरिक्त मैं प्रतियोगिता परीक्षा-संबंधी लेखन भी करता हूँ।

Leave a Reply

पर्यावरण-पुनः प्रयास करें

पर्यावरण पर्यावरण हम सबको दो आवरण हम सब संकट में हैं हम सबकी जान बचाओ अच्छी दो वातावरण पर्यावरण पर्यावरण हे मानव हे मानव पर्यावरण

Read More »

Join Us on WhatsApp