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असफलता से घबराएं नहीं सफलता का पुनः प्रयास करें ( चींटी से सीख)-पूनम मिश्रा

किसी समय की बात है एक राजा जिसकी एक विशाल सेना थी और बहुत बड़ा साम्राज्य था परंतु दुश्मनों के आक्रमण से उसका राज्य नष्ट हो गया वह अपने दुश्मनों के भय से जंगल में भाग गया और एक खंडहर में जाकर छुप गया राजा थकावट के कारण वही थक कर लेट गए और लेटे-लेटे उन्होंने देखा की एक चिटी चावल का दाना मुंह में दबाकर दीवार पर चल रही है पर वह दाना ऊपर ले जाने में बार-बार असफल हो जा रही है क्योंकि जब भी वह दाना लेकर ऊपर चढ़ती तो वह नीचे की तरफ गिर पड़ती कभी वह दाना गिरता कभी वह खुद गिर जाती हर बार वह चावल का दाना को ले जाने में असफल हो रही थी राजा ने ध्यान से देखा कि असफल प्रयासों को उसके गिनते रहे कि वह कितनी बार चावल को ऊपर ले जाने में असफल हो रही है उन्होंने गिना कि वह 16 बार असफल हो गई लेकिन 17वीं बार वह चावल का दाना खींच ले जाने में सफल हो गई उसी समय राजा को एक बिजली का झटका जैसा लगा और वह तुरंत अपने शत्रुओं से लड़ने के लिए वापस अपने राज्य आ गया चींटी का साहस जीवन भर उनका आदर्श बना रहा और वह अपना राज्य पुनः प्राप्त कर लिए क्योंकि चींटी ने अपना लक्ष्य पूरा करके ही दम लिया इसी प्रकार राजा ने यह निश्चय किया कि वह अपना राज्य प्राप्त करके ही दम लेंगे चाहे कितनी बार भी उन्हें प्रयास करना पड़े यह एक सफलता का मंत्र है जो हमें चीटी उदाहरण में भी मिलता है कि गिरो उठो और फिर आगे बढ़ो उस चीटी से हमें भी अपने जीवन में यह शिक्षा अवश्य लेनी चाहिए की असफलता से घबराना नहीं चाहिए और पुनं उठकर हमें सफलता के लिए प्रयास करना चाहिए

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