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अशांति-अजय-प्रताप सिंह

दिल का दर्द बढा करता है, दिल का दर्द दबाने से ।
भंवरे का मन हल्का होता ,कलियों पर मडराने
से ॥
किसको फुर्सत आज यहां , जो सुने रागिनी भौरों की ,
शतरंज बनी है आज जिंदगी, सबको चिंता मोहरो की ,
दुनिया हो गई चोरों की ,लगे भ्रष्टाचार बढ़ाने
से ।
भंवरों का मन हल्का होता ,कलियों पर मडराने
से ।
दिल का दर्द बढा करता है , दिल का दर्द दबाने से ॥
आज जिंदगी फंसी हुई है ,100 पाटो की चक्की में,
भ्रष्ट और पापी बैठे हैं, व्यभिचार की बग्गी में,
दुनिया की भग्गम भग्गी में ,मतलब है धन जुटाने से ।
भंवरे का मन हल्का होता ,कलियों पर मंडराने से । ।
दिल का दर्द …….. — से ॥
पैसे का संसार हुआ है ,पैसे की अशनाई है ,
पैसे से ही घर-घर में , बजती अब शहनाई है,
यह जग ने रीत बनाई है , तुम रहना दूर जमाने से ।
भंवरे का मन हल्का होता, कलियों पर मड़राने से ॥
दिल का दर्द ………. से ॥
बुरा चलन और जलन , आज घर-घर में शोभा देती है,
भांग अफीम चरस गांजे की ,घर घर में होती खेती है ,
बस माॅ ही सम्मति देती है, डर से दूध लजाने
के ।
भंवरे का मन हल्का होता ,कलियों पर मडराने से ॥
दिल का दर्द … . . से ॥
मेरी मानो या ना मानो ,फिर भी तुमसे कहता हूं ,तुम भी इस जग के वासी हो ,मैं भी इस जग में रहता हूं,
अपने दिल की कहता हूं ,मतलब है मुझे बताने से ।
नर्वस यह मन हल्का होता, अपनी कविता गाने से ॥
दिल का दर्द बढा करता है ,दिल का दर्द दबाने से ॥

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