Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

बहते झरने स मन-अंशु कुमत

बहते झरने से सुलह करके आता हूँ
इस बात का अंदेशा है कि कहके मान जाएगा
सबके हिस्से में कुछ और आता है
दिल की भावना है
दिल से कभी सहके और जान जाएगा

Leave a Reply

Join Us on WhatsApp