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चारागाह ही समझों मुझे अपना-शिव सेन

चारागाह ही समझों मुझे अपना तुम
(परवाह करने बाला)
खुद से ज्यादा तुम्हारी पसन्द रखता सोचता हूँ में
में हूँ कि तुम से तुम्हारा हाल पूछता हूँ
कितना पागल हूँ
जबकि हर एक खबर रखता हूँ में

ओर उन दिनों क्या हाल हुआ तुम्हारा जानता हूँ साहब
जब पासिन्दा यादें आई मेरी
फिक्र ना करो में भी अपना हाल तुम्हारा सा रखता हूँ
ओर जानता हूँ कि में तुमसे तुम्ही को माग रहा हूँ पागल जो हूँ
जानता हूँ तुम मेरी नही हो फिर भी तुम पर हक़ रखता हूँ में

चलो छोड़ भी दो मुझे तो कोई गम नही
तुम खुश मिज़ाज़ हो खुश रहो
में गम का जला हूँ
पास अपने जहर -ए-सबब रखता हूँ में

चर्चे सुने होंगे सभी ने मेरी मोहब्बत के मग़र
साहब में बो नही हूँ
जो दिलों में नफ़रतें रखता हूं में

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