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धरती पूत किसान-लवय मिश्रा

हरी भरी धरती की शान |
किसान
धान, गन्नना ,चने की लहलहाती खेती|
उगते सूरज की किरणों से
तारों में खेत का काम करते करते
थकान दूर करने विश्राम की बेला में
एक टक देखते ,
दूर से आने की आहट पा,
घर वाली ,छपरा मै रोटी , मट्ठा का मटका
खनकाती हरी हरी चुरिया |
बजते बिछिया अरू पायल ,
मंदिर में पुजारी बजाते शंख ,घंटा |
पीछे पीछे बफादार भुरा पिल्ला ||
खेत की मेड़ पर
बिछा अंघोछा ,
तिर्रा की रोटी मट्ठे से खा |
ठंडा पानी पी ||
मिट्टी के लाल |
धरती पूत किसान

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