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जिंदगी का आखिरी सफर-विकास-गुप्ता

जिंदगी का आखिरी सफर बड़ा सुहाना होगा
जो कभी मिलते भी नही थे उनका भी मेरे पास आना होगा
जिंदगी का आखिरी सफर बड़ा सुहाना होगा ।

जो कठोर रहते थे, अपनी बात पे अड़े रहते थे
जिनको कुछ भी मेरे से लेना – देना नही था
उनके पास भी आज रोने का एक बहाना होगा
जिंदगी का आखिरी सफर बड़ा सुहाना होगा ।

याद करेंगे मुझे वो सभी लोग उस दिन
जिनकी जिंदगी की कहानियों मे कभी हँसते तो कभी लड़ते मेरे नाम का एक किरदार भी जुड़ गया
लेकिन उनसे दूर जाना यही खुदा का मनमाना होगा
जिंदगी का आखिरी सफर बड़ा सुहाना होगा

मंज़िल की आखिरी सफर मे चल नही पाऊंगा मै अपने पैरो से
मुझे मेरे अपने लेके जायेंगे अपने कांधो पर कुछ उदास होकर या कुछ दुखी होकर
उस दृश्य की सुंदरता का भी क्या पैमाना होगा
जिंदगी का आखिरी सफर बड़ा सुहाना होगा

उस दिन मेरे जिस्म का अंग – अंग ठंडा और शांति से भरा हुआ होगा
न किसी बात की चिंता होगी न ही किसी बात का संताप होगा
उस दिन न ही जिंदगी का भगाना होगा, न ही सताना होगा
जिंदगी का आखिरी सफर बड़ा सुहाना होगा

शायद कुछ बाते होंगी जो अधूरी रह जायेगी
शायद कुछ माफियाँ होगी जिसे मांगने मे देर हो जायेगी
शायद मेरी गलतियों का यही ज़ुर्मांना और खुदा का यही ज़माना होगा
जिंदगी का आखिरी सफर बड़ा सुहाना होगा

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